कब्रिस्तान में बाबा नीम करौली ने बनवाया हनुमान मंदिर, भंडारे में फिर जो हुआ वो चौंका देगा!

नैनीताल की पहाड़ियों में स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर आज श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। लेकिन स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, कभी इस इलाके को लेकर लोगों के मन में डर था। कहा जाता है कि यहां बच्चों को दफनाया जाता था और घने जंगल के कारण लोग दिन में भी आने से कतराते थे। बाबा नीम करौली महाराज ने इसी जगह हनुमान मंदिर स्थापित किया, जिसके बाद यह स्थान धार्मिक पहचान के लिए प्रसिद्ध हो गया।

1953 में स्थापित हुई हनुमान जी की विशाल प्रतिमा
प्रचलित विवरणों के अनुसार, बाबा नीम करौली महाराज ने 15 जुलाई 1952 को यहां छोटी हनुमान प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा कराई थी। इसके बाद 16 जून 1953 को विशाल प्रतिमा स्थापित की गई। इतिहासकार प्रोफेसर अजय रावत की पुस्तक उत्तराखंड का सांस्कृतिक इतिहास में भी मंदिर की स्थापना का उल्लेख मिलता है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस क्षेत्र में पहले भूस्खलन और घने जंगल की वजह से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। बाबा के भक्त मानते हैं कि उनके आने के बाद इलाके की तस्वीर बदल गई और यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने लगी।

जब भंडारे के लिए अचानक पहुंचा राशन
हनुमानगढ़ी से जुड़ी एक प्रचलित कथा के मुताबिक, मंदिर स्थापना के समय भंडारे की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन भारी बारिश के कारण रास्ते बंद हो गए। खाद्य सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो गया। तभी बाबा ने भक्तों को पहाड़ी के नीचे भेजा, जहां कथित तौर पर राशन और सब्जियों से भरा ट्रक मिला। भक्तों ने दुर्गम रास्ते से सामान मंदिर तक पहुंचाया।

एक अन्य कहानी में घी की कमी का जिक्र है। बताया जाता है कि जब भंडारे के दौरान घी खत्म होने लगा, तो बाबा ने पानी से भरे कनस्तरों को छुआ और भक्तों के अनुसार पानी घी में बदल गया। इसी से भोजन तैयार किया गया। ये घटनाएं भक्तों की आस्था से जुड़ी कथाओं के रूप में सुनाई जाती हैं।

भंडारे में पहुंचे हजारों बच्चे, फिर बाबा ने क्या कहा?
हनुमानगढ़ी की सबसे रहस्यमयी कथा बच्चों की आत्माओं से जुड़ी है। शोधकर्ता और डॉक्यूमेंट्री निर्माता कुणाल माधव मिश्रा के हवाले से बताया जाता है कि बाबा के करीबी गुरुदत्त शर्मा ने इस भंडारे से जुड़ा एक प्रसंग साझा किया था।

कहानी के मुताबिक, मंदिर में आयोजित भंडारे के दौरान अचानक बड़ी संख्या में बच्चे प्रसाद लेने पहुंच गए। वहां मौजूद लोग हैरान थे कि इतने बच्चे कहां से आए। मान्यता है कि बाबा ने कहा कि इस स्थान पर मौजूद बच्चों की आत्माओं को मुक्ति मिल गई है और उन्होंने हनुमान जी का प्रसाद ग्रहण कर लिया है। इसके बाद उन्होंने लोगों को डर छोड़ने का संदेश दिया।

आज हनुमानगढ़ी मंदिर बाबा नीम करौली महाराज की स्मृतियों और हनुमान जी के प्रति श्रद्धा का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां से जुड़ी चमत्कारिक कहानियां भक्तों के बीच प्रचलित हैं, हालांकि इन्हें ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित घटनाओं के बजाय स्थानीय मान्यताओं के रूप में देखना उचित है।

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