जान लेबा बैक्टीरियाओं से लड़ने की महत्व पूर्ण सफलताएं
बदायूं : भारत में विकसित (Made-in-India) नई एंटीबायोटिक्स सुपरबग्स के खिलाफ जंग में गेम-चेंजर साबित हो रही हैं। सुपरबग्स वे बैक्टीरिया होते हैं जिन पर आम दवाएं बेअसर हो चुकी हैं।भारत की फार्मास्यूटिकल कंपनियों और चिकित्सा संस्थानों ने इन जानलेवा बैक्टीरिया से लड़ने के लिए महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल की हैं:Zaynich: वोकहार्ट (Wockhardt) द्वारा विकसित यह भारत की पहली नई रासायनिक इकाई (New Chemical Entity) है जिसे अमेरिकी FDA से मंजूरी मिली है। यह गंभीर यूरिनरी ट्रैक्ट और निमोनिया जैसे संक्रमण पैदा करने वाले 'ग्राम-निगेटिव' बैक्टीरिया पर एक साथ तीन स्तरों पर वार करती है, जिससे बैक्टीरिया का प्रतिरोध (resistance) करना मुश्किल हो जाता है।Nafithromycin: यह भारत की पहली स्वदेशी रूप से खोजी गई मैक्रोलाइड (Macrolide) एंटीबायोटिक है। इसे विशेष रूप से समुदाय-आधारित (community-acquired) बैक्टीरिया से होने वाले निमोनिया और जटिल श्वसन संक्रमण के इलाज के लिए तैयार किया गया है।Enmetazobactam: चेन्नई स्थित ऑर्किड फार्मा द्वारा विकसित यह दवा बैक्टीरिया के बचाव तंत्र (defence mechanism) को निष्क्रिय करके गंभीर निमोनिया और ब्लडस्ट्रीम संक्रमणों का इलाज करती है।इन नई दवाओं के आने से स्वास्थ्य विशेषज्ञों को उन गंभीर मामलों में एक नई और मजबूत 'लास्ट-रिसॉर्ट' थेरेपी मिल गई है, जहाँ पारंपरिक दवाएं पूरी तरह से फेल हो चुकी थीं।हालाँकि, ये दवाएं सुपरबग्स के खिलाफ एक नया मोर्चा तो खोल रही हैं, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि सुपरबग्स (AMR) के संकट को पूरी तरह खत्म करने के लिए ओवर-द-काउंटर दवाओं की बिक्री पर रोक और एंटीबायोटिक्स का विवेकपूर्ण इस्तेमाल बेहद जरूरी है.... विष्णु यादव प्रदेश महा सचिव अखिल भारतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन (ABPA) उतर प्रदेश ।
रिपोर्टर : शमसुल हसन अंसारी
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