वजीरगंज में दिव्यांग आश्रम में गूंजा भाई-बहन के प्रेम का संदेश, बहनों ने बांधी राखी दिव्यांग एवं बेसहारा बच्चों के साथ धूमधाम से मनाया रक्षाबंधन का पर्व।
बदायूँ वजीरगंज नगर पंचायत वजीरगंज स्थित दिव्यांग आश्रम में रक्षाबंधन का पर्व इस बार बेहद भावुक और खुशनुमा माहौल में मनाया गया। आश्रम में रह रहे दिव्यांग एवं बेसहारा बच्चों के बीच पहुंचीं बहनों ने उन्हें अपना भाई मानते हुए उनकी कलाई पर राखी बांधी। बहनों के स्नेह और अपनत्व से आश्रम का माहौल भाई-बहन के प्रेम से सराबोर हो गया। बच्चों के चेहरों पर लंबे समय बाद अपने पन और खुशी की झलक साफ दिखाई दी। रक्षाबंधन के अवसर पर भटपुरा, बिसौली निवासी पूजा तिवारी, बदायूं निवासी रेनू शर्मा तथा मकरंदपुर निवासी एक बहन दिव्यांग आश्रम पहुंचीं। उन्होंने आश्रम में रह रहे सभी बच्चों को राखी बांधकर उनके माथे पर सिंदूर का टीका लगाया। इसके बाद बच्चों को मिठाई खिलाई गई तथा फल वितरित कर उनके साथ रक्षाबंधन की खुशियां साझा की गईं। इस दौरान बहन पूजा तिवारी ने कहा कि रक्षाबंधन पर बांधी जाने वाली राखी महज एक धागा नहीं होती, बल्कि यह भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “यह धागा नहीं, बल्कि वह कवच है जो भाई-बहन के प्यार से बनता है। आश्रम में रहने वाला प्रत्येक बच्चा मेरे भाई के समान है और इनके साथ रक्षाबंधन मनाकर मुझे बेहद खुशी महसूस हो रही है।” बहनों ने बच्चों के साथ काफी समय बिताया और उन्हें अपनेपन का एहसास कराया। राखी बंधवाने के बाद बच्चों में भी उत्साह देखने को मिला। मिठाई और फल मिलने से बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने कहा कि समाज के ऐसे बच्चों के साथ त्योहार मनाने से उन्हें परिवार जैसा अपनापन मिलता है और समाज में मानवता एवं भाईचारे का संदेश भी जाता है।
रक्षाबंधन कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि रिश्ते केवल खून के नहीं होते, बल्कि प्रेम, स्नेह और अपनत्व से भी रिश्ते बनते हैं। दिव्यांग एवं बेसहारा बच्चों के साथ मनाया गया यह रक्षाबंधन समारोह लंबे समय तक उनकी यादों में बना रहेगा। उनीश पाल सिंह ने कहा ऐसे आयोजनों से बच्चों को मिलता है परिवार जैसा अपनापन दिव्यांग आश्रम वजीरगंज के उनीश पाल सिंह ने कहा कि रक्षाबंधन जैसे पर्व आश्रम में रहने वाले दिव्यांग एवं बेसहारा बच्चों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। जब बहनें आश्रम पहुंचकर बच्चों को राखी बांधती हैं और उनके साथ त्योहार की खुशियां साझा करती हैं तो बच्चों को परिवार जैसा स्नेह और अपनापन महसूस होता है। उन्होंने कहा कि समाज के सक्षम लोगों को ऐसे बच्चों के बीच समय बिताकर उनके सुख-दुख में सहभागी बनना चाहिए। इस तरह के कार्यक्रम न केवल बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाते हैं, बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारे और मानवता का संदेश भी देते हैं। उन्होंने रक्षाबंधन पर आश्रम पहुंचकर बच्चों को राखी बांधने वाली सभी बहनों का आभार व्यक्त किया।

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