कस्बे में अनंत चतुर्दशी के पावन पर्व पर गणेश उत्सव का समापन हुआ।
बकानी - गणपति बप्पा की विदाई के समय डीजे के साथ श्रद्धालु एवं भक्तगण नाचते गाते हुए जय कारों के साथ गणपति बप्पा का शुभ मुहूर्त में विसर्जन किया गया। कस्बे में घरों और चौराहों पर विराजमान गणपति बप्पा की पूजा अर्चना की गई।तथा ढोल नगाड़ों के साथ *गणपति बप्पा मोरिया, अगले बरस तू जल्दी आ*के जयकारों के साथ विदाई की गई। बकानी कस्बे में सात जगह चौराहों पर गणपति बप्पा विराजमान थे। तथा कई घरों पर भी गणपति बप्पा को विराजमान किया हुआ था। पूरे कस्बे वासियों ने 10- 12 आकर्षक एवं सुंदर झांकियों के माध्यम से विशाल जुलूस निकाला गया।
विसर्जन के समय कस्बे में गणपति बप्पा की एक झलक देखने के लिए पूरा कस्बा उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं की आंखें नम थी। ऐसा लग रहा था मानो गणपति बप्पा हमसे बिछुड़ रहे हैं। लेकिन धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश अपने धाम लौटते हैं। विसर्जन को जीवन के बदलाव से भी जोड़कर देखा जाता है। गणपति बप्पा का आना उत्सव खुशी लेकर आता है। वही विसर्जन हमें विदाई और दोबारा मिलने की उम्मीद का संदेश देता है। विदाई होते समय भक्तगण अगले साल जल्दी आने की कामना करते हैं। विसर्जन के समय कई भक्त गण भावुक हो जाते हैं और आंखों में आंसू बहने लगता है। यही नजारा कालीसिंध नदी पर विसर्जन के समय देखने को मिला। 10 दिन तक चलने वाले गणेश उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी पर होता है। अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा भी इसी दिन की जाती है। 25 सितंबर को भगवान विष्णु की पूजा के साथ अनंत सूत्र धारण किया जाता है, व गणपति बप्पा की विदाई धूमधाम से की जाती है। गणपति विसर्जन से पहले बप्पा की अंतिम पूजा की गई तथा गणपति को दूर्वा, फूल, सिंधूर, अक्षत, मोदक अर्पित किए गए तथा सभी भक्तगणों ने बप्पा से सुख शांति और समृद्धि की कामना की।
रिपोर्टर - रमेश चंद्र शर्मा

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