विद्युत ठेकेदारों द्वारा लगाए जा रहे लोहे के टावर पोल के स्टैंडिंग कार्य में लापरवाही

बकानी - कस्बे से 6 किलोमीटर दूर मेगा हाईवे 89 पर दमक पुरिया टोल के पास बने बरखेड़ा पंचायत के नए पावर हाउस से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सप्लाई के लिए नए बिजली के पोल लगाए गए। रोड के दोनों तरफ लोहे के बड़े टावर लगाए गए। लेकिन बिजली विभाग के ठेकेदार द्वारा नियमों को ताक पर रखकर बिना कंक्रीट सीमेंट बेस बनाए ही खंबों को सीधे मिट्टी में दबाया गया है। ठेकेदार द्वारा गड्ढों में गिट्टी पत्थर की प्लेट और सीमेंट का बेस नहीं डाला जा रहा है। खंबों को केवल चार फीट गहरे गढ़ों में मिट्टी भरकर खड़ा किया जा रहा है। जबकि नियम के मुताबिक गहराई कम से कम से कम 7 फिट होनी चाहिए। 

टावर के अंदर बॉल्डर भी नहीं डाले गए। इन टावरों को रेड ऑक्साइड पेन्ट भी नहीं किया गया। नियम के मुताबिक रेड ऑक्साइड और सिल्वर पेंट डबल कोट में किया जाता है। बिना पेंट किये ही इनको गाढ़ दिया गया है। लेकिन  जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के कारण यह सब चल रहा है। इन खड़े किए गए लोहे के पोल बरसात के पानी में जंग लगकर सड़ने की पूरी संभावना है। कभी भी बड़ा हादसा होने का अंदेशा है। इधर सीमेंट के पोल लगाए गए हैं, उनमें भी मिट्टी भरकर दबा दिया गया है। कई खंबे झुक रहे हैं।
   

स्थानीय निवासियों का कहना है कि लोहे के खंबे अत्यधिक भारी होते हैं। बिना पक्के बेस के खड़े किए गए हैं।यह लोहे के पोल है। थोड़ी सी तेज आंधी या बारिश से मिट्टी ढीली होते ही कभी भी धराशाही हो सकते हैं। लोहे के खंबे होने के कारण बारिश के मौसम में इनमें करंट उतरने से बड़ा हादसा होने की आशंका कई गुना बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्र में होने के कारण आसपास कई गांवों के पशु पूरे वर्ष चरते हैं। 

रिपोर्टर - रमेश चंद्र शर्मा 

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