परसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक मधु भगत का विवादित बयान

बालाघाट : परसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक मधु भगत का विवादित बयान आदिवासियों के हाथों में उनका पारंपरिक तीर-कमान आ गया, तो वे गिन-गिनकर जंगली जानवरों का शिकार करेंगे और “मैं भी उनके साथ आगे रहकर हमला करूंगा।” विधायक के इस बयान के बाद जिले की सियासत गरमा गई है। विधायक मधु भगत के इस बयान पर समाजसेवी रामेश्वर कटरे ने कहा कि 

विधायक जी बयान देने से पहले जरा यह भी सोचिए कि आपके शब्दों का असर जमीन पर क्या होगा!
एक तरफ हमारे आदिवासी भाई-बहन अपनी मेहनत, संघर्ष और शिक्षा के दम पर अधिकारी, शिक्षक और जिम्मेदार पदों तक पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आपके बयान उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा करने वाली मानसिकता को बढ़ावा दे रहे हैं।अगर आदिवासी भाई आपके बयानों को सच मानकर बाघ की हत्या करने निकल पड़े, तो उसके बाद कानूनी कार्रवाई से उसे कौन बचाएगा? क्या आप उसके साथ खड़े होंगे?यह भी समझना जरूरी है कि आदिवासी समाज प्रकृति और वन्यजीवों को केवल जंगल का हिस्सा नहीं मानता, बल्कि अपनी संस्कृति और परंपरा में उनका सम्मान करता आया है। जिस समाज की संस्कृति में बाघ जैसे वन्यजीवों के प्रति भी आस्था और सम्मान है, उसी समाज के सामने उनकी हत्या की बात रखना आखिर किस सोच को दर्शाता है?
समस्या का समाधान बाघ को मारने की बयानबाजी में नहीं, बल्कि इंसान और वन्यजीव के बीच बढ़ते संघर्ष का स्थायी समाधान तलाशने में है। ग्रामीणों की सुरक्षा, फसल और पशुधन की सुरक्षा तथा वन्यजीव संरक्षण—इन सभी पहलुओं पर जिम्मेदार और संवेदनशील नीति की जरूरत है।भारत लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के संविधान से चलता है। इसलिए जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा है कि वे अपने शब्दों से समाज को भड़काने या भ्रमित करने के बजाय कानून, संविधान और सामाजिक जिम्मेदारी के अनुरूप रास्ता दिखाएं।बयानबाजी से तालियां मिल सकती हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं।आदिवासी समाज को भड़काने नहीं, सुरक्षित रखने और सशक्त बनाने की जरूरत है।

रिपोर्टर : विशाल महानंद 

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