पूर्व अध्यक्ष सुचित्रा साहू ने महिला आरक्षण बिल पर सरकार को घेरा
बालोद : पूर्व जनपद अध्यक्ष सुचित्रा साहू ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर देश की महिलाओं को गुमराह कर रही है । महिला आरक्षण विधेयक पहले ही पारित किया जा चुका है, फिर इसके क्रियान्वयन को जनगणना और परिसीमन से जोड़कर अनावश्यक रूप से टाला जा रहा है। सरकार बड़े मुद्दों पर राजनीतिक इच्छा शक्ति दिखाने में हमेशा विफल रही है और असली मुद्दों से लोगों का ध्यान भटका रही है।
महिला आरक्षण बिल सितंबर 2023 में लोकसभा सदन में 454 मतो से और राज्यसभा सदन में 214 मतों से पास हो चुका है। इसे आधिकारिक तौर पर "नारी शक्ति वंदन अधिनियम" कहा गया। इस बिल पर 28 सितंबर 2023 को महामहिम राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर किये और यह कानून बन गया । यह भारत के संविधान का 106 वां संशोधन अधिनियम 2023 बन गया।
दिन भर ढोल पीटा गया की रात 8:30 बजे प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करेंगे । सबको लग रहा था कि महिला आरक्षण बिल पर कोई ठोस बात होगी (जो विधेयक सर्वसम्मति से 2023 में पास हो चुका है),सरकार महंगाई पर बात करेंगे ,किसानों की समस्याएं पर बात करेंगे, बेरोजगारी पर चर्चा करेंगे, महिला सुरक्षा की बात करेंगे, लेकिन जो निकला वह किसी राजनीतिक रैली से भी नीचे स्तर का भाषण था जिसमें देश कम कांग्रेस ज्यादा थे। प्रधानमंत्री जी लगभग 58 बार कांग्रेस का नाम लिये।राष्ट्र के नाम संबोधन हमेशा किसी उपलब्धि या विकट संकट को लेकर होता आया है विपक्षी पार्टी का नाम ले लेकर कोसने को राष्ट्र संबोधन नहीं कहा जाता।सही मायने में सरकार महिलाओं को आरक्षण देना चाहती तो 33% आरक्षण 2024 में ही लोकसभा विधानसभा चुनाव में लागू हो जाता ।
सरकार पार्टी हित और अपने सत्ता में बने रहने के लिए पुराने आंकड़ों(2011 जनगणना) के हिसाब से 50% लोकसभा सीट बढ़ाना चाह रही है यानी 543 सीटों को 850 करना चाह रही है जिससे कई राज्यो को बहुत नुकसान होगा।
प्रधानमंत्री अगर नारी शक्ति का सही में सम्मान करती तो देश में हुए महिलाओं के विरुद्ध विविध घटनाओं पर तत्काल उचित कार्रवाई कर अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को सजा दिलाते। आज भी माननीय मोदी जी के नेतृत्व में पार्टी के कई नेताओं व मंत्रियों को, जिनके ऊपर संगीन अपराध दर्ज है उनका संरक्षण प्राप्त है,वे बेखौफ होकर घूम रहे हैं और विभिन्न अपराधों को बढ़ावा दे रहे हैं। ये बात करते है महिलाओं के सम्मान की,मणिपुर में महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाया गया,मोदी का कोई बयान नही आया।हाथरस कांड,उन्नाव रेपकेस,उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड की आजतक कोई जांच न होना जिसमे भाजपा नेताओं की संलिप्तता है,कोई कार्यवाही नही ,महिला खिलाड़ियों के साथ बलात्कार पर माननीय मोदीजी न ही कोई वक्तव्य दिए और न ही कोई कार्यवाही। यह पूरा मामला दर्शाता है कि महिला सशक्तिकरण सरकार के लिए प्राथमिकता नहीं राजनीतिक मुद्दा बन कर रह गया है।
वैसे भी हमारे प्रधानमंत्री पिछले 12 सालों में एक भी प्रेस वार्ता नहीं किए हैं ,शायद उन्हें अपनी सच्चाई व देश की हकीकत सुनने का डर बना रहता होगा। टेलीप्रॉन्पटर लगाकर मन की बात में बड़ी-बड़ी बातें फेंकने को अपनी बादशाहत समझते हैं। सर्वसम्मति से सितंबर 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल को लागू करने के लिए कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल आज भी तैयार है,लेकिन सरकार की मंशा कुछ और है।
कभी विश्व पटल पर टॉप 10 प्रभावशाली सूची में रहने वाले मोदी जी आज टाइम मैगजीन के टॉप 100 सूची से भी बाहर है देशहित में अंध भक्तों को इन सब से कोई मतलब नहीं।
मैं भी एक महिला होने के नाते महिला आरक्षण बिल के लागू होने के पक्ष में हु पर यह राजनीति ,व किसी भी पार्टी हित में न होकर पूरे देश की महिलाओं के हित में हो।
रिपोर्टर : रमेश कुमार चेलक

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