भाजपा सरकार बताए—छत्तीसगढ़ के लोकपर्वों और संस्कृति को प्राथमिकता देने की उसकी ठोस योजना क्या है?

बालोद : छत्तीसगढ़ के लोकपर्व हमारी माटी, हमारी संस्कृति और हमारी पहचान हैं। हरेली, तीजा-पोरा, भोजली, छेरछेरा जैसे पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी सदियों पुरानी लोकपरंपराओं और ग्रामीण जीवन से जुड़े उत्सव हैं।

भाजपा सरकार पर हमारा स्पष्ट आरोप है कि वह छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकपर्वों और स्थानीय संस्कृति को वह प्राथमिकता नहीं दे रही, जिसकी वे हकदार हैं। छत्तीसगढ़ के अपने लोकपर्वों को अपेक्षित सम्मान देने के बजाय बाहरी प्रदेशों के त्योहारों और आयोजनों को अधिक तवज्जो देना छत्तीसगढ़िया अस्मिता की उपेक्षा है।

भूपेश बघेल जी की कांग्रेस सरकार ने हरेली, तीजा-पोरा और छेरछेरा जैसे लोकपर्वों को सरकारी स्तर पर पहचान दिलाकर उन्हें जन-उत्सव का स्वरूप देने का प्रयास किया था। आज भाजपा सरकार को बताना चाहिए कि छत्तीसगढ़ की उसी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उसकी ठोस योजना क्या है।

हम किसी भी प्रदेश या समुदाय के त्योहार के विरोधी नहीं हैं। भारत की हर संस्कृति का सम्मान होना चाहिए, लेकिन अपनी माटी और अपनी लोकपरंपराओं को पीछे छोड़कर दूसरों की संस्कृति को प्राथमिकता देना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

छत्तीसगढ़ की संस्कृति हमारी पहचान है और उसकी उपेक्षा छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान की उपेक्षा है। कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर लगातार आवाज उठाती रहेगी।

रिपोर्टर : रमेश कुमार चेलक 

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