विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस पर बालोद में संगोष्ठी, कैंडल मार्च व मौन जुलूस आयोजित
बालोद- भारत के इतिहास के सबसे पीड़ादायक अध्यायों में से एक 1947 के विभाजन की विभीषिका को स्मरण करते हुए शुक्रवार, 14 अगस्त को बालोद शहर स्थित सी-मार्ट में ‘विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री श्री गजेंद्र यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे। संगोष्ठी के पश्चात शहर में कैंडल मार्च एवं मौन जुलूस निकालकर विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले तथा विस्थापन और अमानवीय अत्याचारों का दंश झेलने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि “जो राष्ट्र अपने घावों और इतिहास को स्वीकार नहीं करता, वह कभी पूरी तरह स्वस्थ और सौहार्दपूर्ण नहीं हो सकता।” उन्होंने कहा कि 1947 का विभाजन केवल सीमाओं का प्रशासनिक पुनर्निर्धारण नहीं था, बल्कि यह करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाला रक्तरंजित सभ्यतागत आघात था।
उन्होंने कहा कि विभाजन के कारण इतिहास का सबसे बड़ा मानवीय विस्थापन हुआ। लाखों परिवारों को अपना घर-बार, जमीन-जायदाद और वर्षों की स्मृतियां छोड़कर अनजान स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा। असंख्य लोगों ने सांप्रदायिक हिंसा में अपने प्राण गंवाए। महिलाओं और बच्चों ने भीषण अत्याचार झेले। उन्होंने कहा कि विभाजन की पीड़ा को लंबे समय तक पर्याप्त रूप से सार्वजनिक स्मृति का हिस्सा नहीं बनाया गया और विभाजन पीड़ितों की वेदना को याद करना किसी समुदाय के प्रति घृणा नहीं, बल्कि इतिहास के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।
श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2021 को 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की, ताकि विभाजन के दौरान पीड़ित हुए लोगों के संघर्ष, त्याग और बलिदान को देश स्मरण कर सके। उन्होंने कहा कि यह दिवस किसी राजनीतिक लाभ का कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन अनगिनत लोगों के साथ खड़े होने का नैतिक दायित्व है, जिनकी पीड़ा इतिहास के पन्नों में पर्याप्त स्थान नहीं पा सकी।
उन्होंने कहा कि विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आने वाली अनेक ट्रेनों और काफिलों ने मानव त्रासदी की भयावह तस्वीर देखी। लाहौर, रावलपिंडी और मुल्तान जैसे क्षेत्रों से बड़ी संख्या में हिंदू और सिख परिवारों को अपना सब कुछ छोड़कर भारत आना पड़ा। विस्थापित परिवारों ने कठिन परिस्थितियों में शिविरों और अस्थायी बस्तियों से अपने जीवन की नई शुरुआत की, लेकिन अपने साहस, परिश्रम और राष्ट्रनिष्ठा के बल पर उन्होंने भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। व्यापार, कृषि, शिक्षा, उद्योग और रक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में विभाजन पीड़ितों का योगदान देश के विकास की अमूल्य विरासत है।
मंत्री श्री यादव ने कहा कि विभाजन की स्मृति हमें यह भी चेतावनी देती है कि अलगाववाद, सांप्रदायिकता और तुष्टिकरण की राजनीति के दुष्परिणाम कितने गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास को याद करना नफरत फैलाना नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि देश 1984 के दंगों और आपातकाल जैसी ऐतिहासिक घटनाओं को याद करता है, तो विभाजन के पीड़ितों की पीड़ा को याद करने पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए? “सच सांप्रदायिक नहीं होता, बल्कि इतिहास के प्रति चुप्पी समाज को कमजोर करती है।”
उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान जिन लोगों ने अपना सर्वस्व गंवाया, उनकी पीड़ा को सम्मान देना और उनकी स्मृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत ने विभाजन की पीड़ा के बावजूद लोकतंत्र, समान अधिकार और अपनी सभ्यतागत मूल्यों की राह चुनी, यही भारत की शक्ति और व्यापक दृष्टि का परिचायक है।
जिला अध्यक्ष चेमन देशमुख ने कहा— इतिहास को याद करना आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी
कार्यक्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष श्री चेमन देशमुख ने भी विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि 14 अगस्त को मनाया जाने वाला यह स्मृति दिवस 1947 के विभाजन के दौरान पीड़ित हुए लोगों, उनके संघर्ष और बलिदान को याद करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के बाद 2021 से इस दिवस के माध्यम से विभाजन की त्रासदी को राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा बनाने का प्रयास किया गया है।
श्री देशमुख ने कहा कि विभाजन के दौरान अनेक परिवार विस्थापित हुए और बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि आज भी पाकिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों से जुड़े प्रश्न और वहां से भारत आने वाले पीड़ित परिवार हमें विभाजन के अधूरे अध्याय की याद दिलाते हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के माध्यम से ऐसे पड़ोसी देशों से धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर भारत आने वाले कुछ निर्दिष्ट समुदायों के लिए नागरिकता का मार्ग उपलब्ध कराया गया है।
उन्होंने कहा कि विभाजन की पीड़ा को याद करना किसी के विरुद्ध घृणा पैदा करना नहीं है। इतिहास के सभी पक्षों को ईमानदारी से स्वीकार करना ही सच्चे अर्थों में लोकतांत्रिक और संवेदनशील समाज की पहचान है।
भूले-बिसरे पीड़ितों को श्रद्धांजलि
संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि विभाजन के दौरान अपने परिवार, घर, जमीन और जीवन की सुरक्षा खोने वाले लोगों की स्मृतियों को संरक्षित करना आवश्यक है। विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि इतिहास की त्रासदियों से सीख लेकर देश में सामाजिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और आपसी विश्वास को और मजबूत किया जाए।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने विभाजन के दौरान दिवंगत हुए लोगों की स्मृति में श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके पश्चात शहर में कैंडल मार्च एवं मौन जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं नागरिक शामिल हुए।
ये रहे प्रमुख रूप से उपस्थित
कार्यक्रम में पूर्व जिला अध्यक्ष पवन साहू, पूर्व जिला मंत्री राकेश यादव, प्रीतम साहू, वीरेंद्र साहू, लेखराम साहू, महामंत्री द्वय राकेश ‘छोटू’ यादव एवं सौरभ लुनिया, प्रतिभा चौधरी,ठाकुर रामचंद्राकार, कौशल साहू, टिनेश्वर बघेल, भुनेश्वरी ठाकुर, पवन सोनबरसा, सोमेश सोरी,सुरेंद्र देशमुख, प्रेम साहू, चंद्रलता साहू, पूजा यादव, निशा योगी, हरिश कटझरे, मनीष झा, जितेंद्र साहू, किशोरी साहू,कमलेश सोनी, प्रदीप साहू, लाल निवेन्द्र सिंह टेकाम,देवेन्द्र माहला, श्याम बिहारी जयसवाल,राजेश दसोडे लोकेश श्रीवास्तव,विनोद जैन, कमल पनपालिया, मोपेन्द्र साहू,अमित चोपड़ा, रुपेश नायक, धर्मेंद्र साहू, टुकेश्वर पांडे, आनंद शर्मा, सुरेश साहू,अरुण साहू, कुलदीप साहू अश्वन बारले,संतोष कौशिक, पुष्पेंद्र तिवारी,समीर खान,नरेंद्र सोनवानी, हितेश्वरी कौशिक, सहित जिला मोर्चा के पदाधिकारी, शहर मंडल के पदाधिकारी, जिला प्रकोष्ठों के संयोजक एवं सह-संयोजक तथा बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी जिला बालोद के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
रिपोर्रटर -रमेश कुमार चेलक
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