दिव्यांगता को चुनौती देकर 20 वर्षों से शिक्षा की अलख जगा रहे रुपेश सोनकर
बालोद : शासकीय बुनियादी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालोद (पाररास) में अंशकालीन स्कूल सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत रूपेश कुमार सोनकर पिछले करीब 20 वर्षों से निःस्वार्थ भाव से विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा देकर समाज में अलग पहचान बना रहे हैं। स्वयं दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने अपनी परिस्थितियों को बाधा नहीं बनने दिया और पढ़ाई में कमजोर, कक्षा 10वीं-12वीं में असफल अथवा पढ़ाई छोड़ चुके विद्यार्थियों को ओपन कक्षाओं के माध्यम से निशुल्क ट्यूशन देकर आगे पढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनके मार्गदर्शन से कई विद्यार्थी परीक्षा में सफल होकर आगे की शिक्षा जारी रख सके हैं। शिक्षा के साथ रूपेश सोनकर पर्यावरण संरक्षण और खेल गतिविधियों में भी सक्रिय हैं। विद्यार्थियों के जन्मदिन पर पौधे, फाइल, कॉपी और पेन का निशुल्क वितरण कर वे शिक्षा एवं पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश देते हैं। कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों, विशेषकर बालिकाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी उनकी पहल उल्लेखनीय है। खेल के क्षेत्र में उन्होंने जिला एवं राज्य स्तर पर उपलब्धियां हासिल की हैं। सोनकर समाज की महासभा राजिम की ओर से उन्हें रजत पदक एवं प्रमाण-पत्र भी प्राप्त हुआ है। एक स्कूल सफाई कर्मचारी के रूप में कार्य करते हुए शिक्षा, पर्यावरण और खेल के क्षेत्र में लगातार योगदान देना रूपेश सोनकर की कर्मठता और सेवा भावना को दर्शाता है।
शिक्षक दिवस पर इनको कई सम्मान प्राप्त हुए हैं
सन 2016 में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालोद के छात्र छात्राओं ने श्रीफल देकर सम्मानित किया है
सन 2019 में ओमन भारद्वाज द्वारा पेन और डायरी देकर सम्मानित किया।
सन 2023 में विद्या मेंश्राम जी ने छत्तीसगढ़ की छाया चित्र देकर सम्मानित किया है
जवाहर प।र। की संध्या उइके ने कहा
रूपेश सोनकर सर जी क। पढ़।ने का तरीका बहुत अच्छा है जो पढ़।ते हैं बहुत अच्छे से समझ में आता है मैं कक्षा आठवीं में पूरक आ गई थी सर जो के निशुल्क ट्यूशन पढ़।ने से मैं उत्तीर्ण हुई । सोनकर जी शिक्षक के रूप में अग्रणी है।
रिपोर्टर : रमेश कुमार चेलक
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