राहुल गांधी को चुनाव आयोग और देश से भी माफी मांगनी चाहिए : श्री आनंद यादव

बालोद : चुनाव आयोग के संयुक्त बयान से कांग्रेस और विपक्षी इंडी गठबंधन के झूठ का पर्दाफाश। भ्रम और मनगढ़ंत कहानियों की राजनीति पूरी तरह ध्वस्त बलौदा बाजार।लगभग सौ बार चुनाव हार चुके कांग्रेस नेता राहुल गांधी अब बौखलाहट में लगातार देशद्रोही आचरण पर उतारू हो गए हैं। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुआई में कांग्रेस अब देश की तमाम संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने, लगातार झूठ और फरेब के राजनीति कर देश को बदनाम करने में जुटी हुई है।

देश के मुख्य चुनाव आयुक्त समेत तीनों आयुक्तों के संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस से यह साबित हो गया है कि आयोग में मतभेद संबंधी कांग्रेस के तमाम दावे न केवल खोखले हैं, बल्कि जान-बूझ कर देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुचाने और भारत की संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने की राहुल गांधी की सोची-समझी साजिश है।

केंद्रीय चुनाव आयोग के संयुक्त प्रेस नोट से दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है। यह फिर से साबित हो गया है कि कांग्रेससिर्फ और सिर्फ झूठ, सनसनी और भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। उसका झूठ फिर से बेनकाब हो गया है।

अपने संयुक्त बयान में आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि एसआईआर समेत सभी फैसलेतीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए। भारत के चुनाव आयोग की दुनिया भर में साख है। उसके निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष की हताशा का प्रतीक है। कांग्रेस को ऐसी हरकतों से बाज आना चाहिए।

इस संबंध में अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट भी कोरी कल्पना के अलावा कुछ नहीं है। समाचार में कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखे जिस पत्र का जिक्र है, वह न तो किसी किसी नीतिगत विषय से संबंधित है, न ही एसआईआर से संबंधित। वह सामान्य प्रशासकीय विषय था। वैसे भी चुनाव आयोग सीधे राष्ट्रपति जी के प्रति जिम्मेदार है, इसलिए कैबिनेट सचिव को किसी नीतिगत मामले पर पत्र लिखने का अकोई तुक ही नहीं है, न हीआयुक्तों ने ऐसा कोई पत्र लिखा है। 

अफसोस की बात यह है कि जिन विषयों को सुप्रीम कोर्ट तक सही ठहरा चुका है, उसके खिलाफ भी कांग्रेस झूठ फैला रही है। फॉर्म-6 के घोषणापत्र समेत अनेक विषयों पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय से पहले ही पक्ष में निर्णय आ चुका है, फिर भी कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने कीनाकाम कोशिश करती रहती है।कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय तथ्यों का सम्मान करना चाहिए।

जब भी कांग्रेस जनता की अदालत में पराजित होती है, वह अपनी खीझ और हताशा निकालने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप मढ़ने लगती है। निर्वाचन आयोग के स्पष्ट और कड़े वक्तव्य ने विपक्ष के सभी झूठ और दुर्भावनापूर्ण प्रोपेगेंडा की हवा निकाल दी है।जैसा कि आपने देखा है मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तोंडॉ. एस. एस. संधू एवं डॉ. विवेक जोशीने कल दोपहर 3 बजे बैठक कर एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी किया जिसमें यह स्पष्ट कर दिया गया है कि देश भर में संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन सहित सभी प्रमुख निर्णय सर्वसम्मतिसे लिए गए हैं।

रिपोर्टर : बलदाऊ सिंह ठाकुर

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