सेवा संकल्प अभियान नन्हे हाथों में रंगों का संकल्प: ‘मेरे सपनों का भारत’ से गढ़ा जा रहा विकसित राष्ट्र का खाका

बालोद : किसी भी राष्ट्र की प्रगति और समृद्धि की वास्तविक रूपरेखा उसके विद्यालयों की कक्षाओं में तैयार होती है। नौनिहालों के मन में देश के प्रति जो भाव और कल्पनाएं अंकुरित होती हैं, वही भविष्य के भारत की आधारशिला बनती हैं। राज्य शासन द्वारा संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत बालोद जिले में आयोजित ‘मेरे सपनों का भारत’ चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता केवल एक स्पर्धा नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की अंतरात्मा से उपजी राष्ट्र-निर्माण की पावन अभिव्यक्ति बनकर उभरी है। विद्यालय स्तर से लेकर विकासखंड और फिर जिला स्तर तक फैली इस रचनात्मक मुहिम ने यह सिद्ध कर दिया है कि बालोद के बच्चे केवल वर्तमान के साक्षी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सजग शिल्पकार भी हैं।
 
विद्यालय स्तर से जगी रचनात्मक अलख
 
इस अभिनव यात्रा की शुरुआत जिले के सुदूर अंचलों में स्थित प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों से हुई। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के कुशल मार्गदर्शन और जिला पंचायत सीईओ सह नोडल अधिकारी श्री सुनील कुमार चंद्रवंशी के सुव्यवस्थित निर्देशन में जिले के स्कूलों में सकारात्मक वातावरण निर्मित किया गया। कक्षाओं के शांत कमरों में जब बच्चों को श्वेत कागज और रंग सौंपे गए, तो उन्होंने केवल रेखाएं नहीं खींचीं, बल्कि अपने सपनों का एक संपूर्ण राष्ट्र कैनवास पर उतार दिया। बच्चों ने आधुनिक भारत की वैज्ञानिक प्रगति, पर्यावरण संतुलन, अंतरिक्ष अन्वेषण, डिजिटल क्रांति और गांव-शहर के सामंजस्य को रंगों की जुबानी बयां किया।
 
कैनवास पर साकार हुआ आत्मनिर्भर और समरस भारत
 
चित्रकला के माध्यम से विद्यार्थियों द्वारा उकेरे गए ‘सेवा चित्र’ उनके गहरे सामाजिक सरोकार को दर्शाते हैं। किसी छात्र के चित्र में स्वच्छ, हरित और जल-संरक्षित गांव की तस्वीर दिखी, तो किसी ने सौर ऊर्जा, उन्नत कृषि और बुलेट ट्रेन से दौड़ते आधुनिक भारत को चित्रित किया। नन्हें चित्रकारों ने केवल भौतिक विकास ही नहीं, बल्कि सेवा, समरसता, सुशासन और कुपोषण-मुक्त समाज की संकल्पना को भी अपने चित्रों का केंद्र बनाया। इन कलाकृतियों में यह स्पष्ट झलका कि भावी पीढ़ी का भारत केवल आर्थिक रूप से सशक्त ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, शिक्षित और मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत होगा।
 
विद्यालय से ब्लॉक और फिर जिला स्तरीय महाकुंभ
 
विद्यालय स्तर पर मिली अपार सफलता और बच्चों के उत्साह को देखते हुए प्रतियोगिता को विकासखंड स्तर पर ले जाया गया, जहाँ प्रत्येक ब्लॉक के सर्वश्रेष्ठ हुनरमंदों ने अपनी कला और ओजस्वी विचारों का जौहर दिखाया। इसके उपरांत जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर में आयोजित एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रतियोगिता इस बौद्धिक एवं सांस्कृतिक यात्रा का चरमोत्कर्ष साबित हुई। जिले के सभी पांचों विकासखंडों से चयनित होकर आए मेधावी प्रतिभागियों ने जब जिला स्तरीय मंच पर अपने चित्रकला और शब्दों का जलवा दिखाया, तो निर्णायक मंडल भी उनकी कल्पनाशीलता, तार्किक चिंतन और रचनात्मक प्रस्तुति को देखकर अभिभूत हो उठे।
 
राज्य स्तर पर चमकेगी बालोद की हुनर 
 
  जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभाशाली विजेता अब राज्य स्तरीय स्पर्धा में बालोद जिले का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं। स्थानीय स्तर से निकली यह प्रतिभा जब राज्य के पटल पर अपनी कला का प्रदर्शन करेगी, तो वह न केवल जिले के गौरव को बढ़ाएगी, बल्कि यह संदेश भी देगी कि दूरदर्शी प्रशासनिक पहल से जमीनी प्रतिभाओं को कितना बड़ा आकाश मिल सकता है।
 
सेवा और संकल्प का सुंदर संगम
 
‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित इस गतिविधि का मुख्य ध्येय विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, नेतृत्व क्षमता, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक दायित्वों के प्रति सजगता का संचार करना रहा है। रंगों के माध्यम से बच्चों ने जो ‘सपनों का भारत’ कैनवास पर सजाया है, वह दरअसल एक विकसित, सशक्त और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ तथा भारत की स्पष्ट रूपरेखा है। बालोद जिले के विद्यार्थियों का यह कलात्मक संकल्प आने वाले कल के लिए एक उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य का मजबूत विश्वास दिलाता है।
क्रमांक/833/चंद्रवंशी
 
रिपोर्टर : रमेश कुमार 

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