रंजीत सैनी की संदिग्ध मृत्यु के मामले में निष्पक्ष जांच एवं दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग
बलरामपुर - तुलसीपुर, ग्राम सेखुइनिया कला निवासी रंजीत सैनी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु के मामले में निष्पक्ष जांच एवं दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर जिला उद्योग व्यापार मंडल के महामंत्री दिलीप कुमार गुप्ता के नेतृत्व में माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी तुलसीपुर के माध्यम से सौंपा गया।
ज्ञापन के माध्यम से थाना कोतवाली तुलसीपुर एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुलसीपुर की भूमिका की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि रंजीत सैनी को थाने पर बुलाए जाने से लेकर उनकी तबीयत बिगड़ने, अस्पताल में उपचार, घर भेजे जाने तथा दोबारा अस्पताल ले जाते समय हुई मृत्यु तक के संपूर्ण घटनाक्रम की गहनता से जांच कराई जाए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रंजीत सैनी को ट्रक का पहिया खोलने के आरोप में थाना कोतवाली तुलसीपुर बुलाया गया था। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुलसीपुर ले जाया गया। इस दौरान प्रसारित एक वीडियो में वह दर्द से कराहते हुए अपनी जान बचाने की गुहार लगाते दिखाई देते हैं। आरोप है कि अस्पताल से घर भेजे जाने के बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई और परिजन उन्हें दोबारा अस्पताल ले जा रहे थे, तभी उनकी मृत्यु हो गई।
इस गंभीर प्रकरण में ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि पुलिस की कार्रवाई, अस्पताल में उपलब्ध कराए गए उपचार, चिकित्सकीय अभिलेखों तथा संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। प्रसारित वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को जांच में शामिल करते हुए मृत्यु की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जाए।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि दो पुलिसकर्मियों के निलंबन की जानकारी सामने आई है, लेकिन मामले की संपूर्ण सच्चाई सामने लाने और जवाबदेही तय करने के लिए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है। जांच इस प्रकार कराई जाए कि किसी भी विभाग के प्रभाव से मुक्त होकर तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जा सके।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें उठाई गईं—
1. रंजीत सैनी को थाने पर बुलाए जाने के आधार एवं अपनाई गई कानूनी प्रक्रिया की जांच कराई जाए।
2. थाने में उनकी तबीयत बिगड़ने की परिस्थितियों की गहन पड़ताल हो।
3. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दिए गए उपचार एवं उन्हें घर भेजने के निर्णय की समीक्षा की जाए।
4. वीडियो, चिकित्सकीय अभिलेखों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों सहित सभी साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच हो।
5. जांच में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों, चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों अथवा अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
6. निर्धारित समयसीमा में जांच पूरी कराकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
जिला उद्योग व्यापार मंडल के महामंत्री दिलीप कुमार गुप्ता ने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की मृत्यु का नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन एवं सुरक्षा, मानवाधिकारों और पुलिस तथा स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति जनविश्वास से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच होना आवश्यक है। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही, कर्तव्यहीनता या अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने शासन से पुरजोर मांग की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच के आदेश दिए जाएं तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए। इस अवसर पर श्याम बिहारी, रूप चंद्र, प्रदीप कुमार, राधेश्याम चौरसिया, ओम प्रकाश, राम दयाल सोनी एवं उदय अग्रहरि सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
रिपोर्टर - अनुराग श्रीवास्तव

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