उखड़ी आरसीसी सड़कें और जलभराव से परेशान बच्चे

बांदा। कस्बा कमासिन में रविवार को बच्चों की रैली ने स्थानीय विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं की बदहाली पर सवाल खड़े कर दिए। कामेश्वर नाथ मंदिर परिसर स्थित अमृत सरोवर में गंदा पानी गिराए जाने, जर्जर सड़कों, जलभराव और खराब जल निकासी व्यवस्था के विरोध में बच्चों ने रैली निकालकर जिम्मेदारों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग उठाई।

रैली के दौरान बच्चों ने कहा कि जिस अमृत सरोवर को स्वच्छ और सुंदर बनाने का दावा किया गया था, उसमें आसपास के घरों का गंदा पानी लगातार पहुंच रहा है। इससे तालाब की स्थिति खराब हो रही है। समाजसेवी राजू चौरसिया ने आरोप लगाया कि तालाब के सुंदरीकरण के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद मौके पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने तालाब की मिट्टी और सुंदरीकरण कार्य में अनियमितता की जांच कराने की मांग की।

छह महीने में उखड़ गईं आरसीसी सड़कें!

बच्चों ने ग्राम पंचायत में कराए गए सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कई आरसीसी सड़कें निर्माण के कुछ ही महीनों बाद उखड़ने लगीं। बारिश के दौरान जगह-जगह जलभराव होने से बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है। राजू चौरसिया ने नालियों और जल निकासी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बरसात में लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। उन्होंने ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों और भुगतान की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।

एलएनटी की खोदी सड़क भी बनी मुसीबत

कस्बे में एलएनटी द्वारा खोदी गई सड़क की समुचित मरम्मत नहीं होने से भी लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क, नाली और तालाब की स्थिति का मौके पर निरीक्षण कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की। राजू चौरसिया ने कहा कि कामेश्वर नाथ मंदिर जैसे धार्मिक स्थल के परिसर में तालाब की ऐसी स्थिति चिंता का विषय है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से कमासिन को नगर पंचायत का दर्जा देने और कस्बे में सफाई, जल निकासी, सड़क तथा अन्य नागरिक सुविधाओं को दुरुस्त कराने की मांग की। अब बड़ा सवाल यह है कि लाखों रुपये के विकास कार्यों के बावजूद अगर तालाब गंदे पानी*अमृत सरोवर बना गंदगी का तालाब! बच्चों ने सड़क पर उतरकर खोला विकास कार्यों का ‘कच्चा चिट्ठा’ कामेश्वर नाथ मंदिर परिसर में गंदे पानी की मार, 

उखड़ी आरसीसी सड़कें और जलभराव से परेशान बच्चे

बांदा। बबेरू क्षेत्रान्तर्गत कस्बा कमासिन में रविवार को बच्चों की रैली ने स्थानीय विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं की बदहाली पर सवाल खड़े कर दिए। कामेश्वर नाथ मंदिर परिसर स्थित अमृत सरोवर में गंदा पानी गिराए जाने, जर्जर सड़कों, जलभराव और खराब जल निकासी व्यवस्था के विरोध में बच्चों ने रैली निकालकर जिम्मेदारों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग उठाई।

रैली के दौरान बच्चों ने कहा कि जिस अमृत सरोवर को स्वच्छ और सुंदर बनाने का दावा किया गया था, उसमें आसपास के घरों का गंदा पानी लगातार पहुंच रहा है। इससे तालाब की स्थिति खराब हो रही है। समाजसेवी राजू चौरसिया ने आरोप लगाया कि तालाब के सुंदरीकरण के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद मौके पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने तालाब की मिट्टी और सुंदरीकरण कार्य में अनियमितता की जांच कराने की मांग की।

छह महीने में उखड़ गईं आरसीसी सड़कें!

बच्चों ने ग्राम पंचायत में कराए गए सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कई आरसीसी सड़कें निर्माण के कुछ ही महीनों बाद उखड़ने लगीं। बारिश के दौरान जगह-जगह जलभराव होने से बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है। राजू चौरसिया ने नालियों और जल निकासी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बरसात में लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। उन्होंने ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों और भुगतान की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।

एलएनटी की खोदी सड़क भी बनी मुसीबत

कस्बे में एलएनटी द्वारा खोदी गई सड़क की समुचित मरम्मत नहीं होने से भी लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क, नाली और तालाब की स्थिति का मौके पर निरीक्षण कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की। राजू चौरसिया ने कहा कि कामेश्वर नाथ मंदिर जैसे धार्मिक स्थल के परिसर में तालाब की ऐसी स्थिति चिंता का विषय है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से कमासिन को नगर पंचायत का दर्जा देने और कस्बे में सफाई, जल निकासी, सड़क तथा अन्य नागरिक सुविधाओं को दुरुस्त कराने की मांग की। अब बड़ा सवाल यह है कि लाखों रुपये के विकास कार्यों के बावजूद अगर तालाब गंदे पानी से भर रहा है और सड़कें कुछ ही महीनों में उखड़ रही हैं, तो आखिर इन कार्यों की गुणवत्ता और भुगतान की जांच कब होगी?

रिपोर्टर - अरुण मिश्रा 

 

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