श्रीरामलीला तिन्दवारी में सूपर्णखा प्रसंग, खर-दूषण वध एवं सीता हरण की लीला का भावपूर्ण मंचन
तिन्दवारी/बांदा : श्रीरामलीला कमेटी तिन्दवारी के तत्वावधान में आयोजित रामलीला महोत्सव में आज सूपर्णखा प्रसंग, खर-दूषण वध एवं माता सीता के हरण की मनोहारी लीलाओं का मंचन किया गया। कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों को रामकथा के घटनाक्रम से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
सूपर्णखा प्रसंग से प्रारंभ हुई लीला में लक्ष्मण जी द्वारा सूपर्णखा का नाक-कान काटे जाने, तत्पश्चात खर-दूषण के वध और रावण द्वारा छलपूर्वक माता सीता के हरण के प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। सीता हरण के मंचन के साथ ही वातावरण में करुणा और आगामी घटनाक्रम के प्रति उत्सुकता छा गई।
श्रीरामलीला कमेटी के प्रबंधक हरवंश श्रीवास्तव ने कहा कि रामायण के ये प्रसंग हमें सिखाते हैं कि अहंकार, प्रतिशोध और छल अंततः विनाश का मार्ग प्रशस्त करते हैं। प्रभु श्रीराम की लीला धर्म, मर्यादा और सदाचार की स्थापना का संदेश देती है। रामलीला का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों एवं सांस्कृतिक चेतना को जागृत करना है।
कार्यक्रम की अतिथि दीर्घा में जिला सह-संयोजक, शिक्षक प्रकोष्ठ भाजपा पवन निगम, डॉ कामता कुशवाहा, दीपू चिल्ला उपस्थित रहे।
इस अवसर पर श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष अनिल लखेरा, महामंत्री अरविंद गुप्त, कोषाध्यक्ष नमन गुप्त, प्रबंधक हरवंश श्रीवास्तव सहित कमेटी के पदाधिकारी, श्रीरामकार्यसेवक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
“अधर्म चाहे छल का सहारा ले, विजय अंततः सत्य और धर्म की ही होती है, यही रामकथा का शाश्वत संदेश है।”
रिपोर्टर : क़ासिद अली सिद्दीकी

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