राम-सुग्रीव मित्रता से लंका दहन तक गूंजा तिन्दवारी का रामलीला मंच
तिन्दवारी - बांदा श्रीरामलीला कमेटी तिन्दवारी के तत्वावधान में आयोजित रामलीला महोत्सव में आज राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध, सीता खोज, सुंदरकांड एवं लंका दहन की लीलाओं का मनोहारी मंचन हुआ। कलाकारों के सजीव अभिनय ने श्रद्धा, शौर्य और भक्तिभाव से वातावरण को राममय कर दिया। प्रभु श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता ने विश्वास एवं मित्रधर्म की महत्ता दर्शाई, वहीं बाली वध ने न्याय और कर्तव्य के प्रश्नों को मंच पर जीवंत किया। माता सीता की खोज में हनुमान जी के अदम्य साहस, समुद्र लांघने, अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट और लंका दहन के प्रसंगों ने दर्शकों में विशेष उत्साह भर दिया। हनुमान जी का पराक्रम और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अनन्य भक्ति आकर्षण का केंद्र रही।
विशिष्ट अतिथि दीर्घा में किसान मोर्चा भाजपा के अध्यक्ष ठाकुर सत्येंद्र प्रताप सिंह एवं इंदौर के फाइनेंस एडवाइजर पुष्पेंद्र सिंह उपस्थित रहे। कमेटी सदस्यों में सुनील तिवारी, संतोष गुप्ता,अनमोल गुप्त, इंजीनियर आलोक द्विवेदी,इंजीनियर सोमिल गुप्ता ‘ईशु’ एवं निहाल सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। दर्शक दीर्घा में शिक्षक अनूप पटेल, राहुल पटेल एवं डॉ. कामता सहित अनेक रामभक्तों ने लीला का आनंद लिया। श्रीरामलीला कमेटी के प्रबंधक हरवंश श्रीवास्तव ने कहा कि राम-सुग्रीव मित्रता विश्वास का, हनुमान जी का चरित्र समर्पण का और लंका दहन अन्याय के विरुद्ध साहस का प्रतीक है। रामकथा हमें सिखाती है कि जब निष्ठा, विवेक और संकल्प एक साथ खड़े होते हैं, तब बड़ी से बड़ी बाधा भी मार्ग नहीं रोक सकती। रामलीला की सार्थकता तभी है, जब उसके आदर्श हमारे आचरण में उतरें। “हनुमान जी ने लंका में केवल अग्नि नहीं प्रज्वलित की, बल्कि अधर्म के अंधकार के बीच धर्म और विजय की आशा का दीप भी जला दिया।”
रिपोर्टर - क़ासिद अली सिद्दीकी

No Previous Comments found.