देवघर अस्पताल से मृतक सरस्वती देवी का शव लाने से इनकार किया परिजन
बांका : बांका जिले के चांदन थाना अंतर्गत बिरनिया पंचायत के नीलकोठी गांव में 7 दिसंबर को एक 63 वर्षीय मौसोमात सरस्वती देवी अबला, असहाय, वंशहीन महिला के साथ हृदय विदारक घटना घट गई। काफी ठंड था, सरस्वती देवी अपने घर में अकेले रहती थी। इसे कोई औलाद नहीं था। ठंड से बचने के लिए अपने घर में आलाव जलाकर अपने शरीर को सेक रही थी। लेकिन किसी कारण से पहनी हुई साड़ी में आग लग गई। और वह जूलस गई। फिर किसी तरह कपड़ा बदलते हुए गांव के अड़ोस- पड़ोस के घर गई और अपनी आपबीती सुनाई। लेकिन किसी ने कोई सहारा नहीं दिया। किसी सज्जन ने एंबुलेंस वाले को फोन कर दिया। और 8 दिसंबर करीबन 12:00 बजे एंबुलेंस वाले ने चांदन अस्पताल में भर्ती कराया। जहां प्राथमिक उपचार करने के बाद उसे देवघर सदर रेफर कर दिया गया। लेकिन बेचारी सरस्वती देवी के साथ कोई रिश्तेदार साथ में नहीं था।
प्राप्त समाचार के अनुसार मृतक सरस्वती देवी असहाय होने के कारण, देवघर अस्पताल में इलाज के दौरान 22 दिनों से जिंदगी और मौत से झूजती रही, लेकिन गांव की गोतिया के लोग उनसे कोई मुलाकात नहीं किया। परिणाम स्वरूप अंत में जिंदगी और मौत से झूलती हुई 30 तारीख को हार गई और उसकी मौत हो गई। अब अस्पताल का आलम यह है कि सरस्वती देवी इलाज के दौरान कोई सहयोग या रिश्तेदार नहीं आए थे। भर्ती के दौरान भी कोई पता नहीं था। और ना वह अपना आधार कार्ड लेकर आई थी। मृत्यु के पश्चात अस्पताल प्रबंधन की ओर से बैजनाथ धाम ओपी पुलिस को मामले से अवगत कराते हुए विधिवत कार्रवाही का अनुरोध किया गया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पहचान के लिए 72 घंटे तक शवगृह में सुरक्षित रख लिया है।
नीलकोठी गांव निवासी मृतक सरस्वती देवी के चचेरे भतीजे मंटू राय, अमीन राय, राजेंद्र राय, चंपा देवी, गौतनी जगिया देवी पति स्वर्गीय रामेश्वर राय आदि ने बताया कि सरस्वती देवी को काफी जमीन था , लेकिन भू-माफियाओं के द्वारा मृतक मौसोमात सरस्वती देवी को हम परिवारों से मेल नहीं होने दिया। क्योंकि उसके हिस्से की जमीन करोड़ों रुपया की है। हमेशा हम परिवारों से दूर रही, क्योंकि भू माफिया जानता था। जमीन की क्या वैल्यू है। साथ ही अपने परिजन में मेल होगा, फिर हम जमीन नहीं ले पाएंगे। इसलिए उन लोगों का हमेशा हम परिवारों में फूट डालो राज करो वाली कहावत चरितार्थ किया। और धीरे-धीरे सरस्वती देवी को बहला फुसला कर ओने-पोणे दाम में सारी जमीन लिखवा लिया है। कभी सरस्वती देवी बगल गृह भू-माफियाओं के यहां जाती है वहां अच्छे-अच्छे पकवान खिलाकर 5 केजी आलू, 10 केजी चावल देकर भेज देती थी। उसी में मेरी चाची खूश रहती थी।
चम्पा देवी ने बतायी कि जब वह माफिया सारी संपत्ति बांका रजिस्ट्री कोर्ट से निबंध कर लिया ।अब सभी लोगों ने असहाय उसे छोड़ दिया। हम सबों में भी आपस में मिलत नहीं था। जिस दिन घटना घटी उस दिन भी हम लोगों के पास नहीं आयी, बल्कि जमीन खरीददार के यहां गयी थी। जिसने एंबुलेंस बुलाकर एंबुलेंस से चांदन अस्पताल भेज दिया। फिर क्या हुआ इसकी मुझे जानकारी नहीं है। उसकी इलाज कहां हुई, किसने देवघर ले गया मुझे कोई जानकारी नहीं है।
यह घटना दर्शाती है कि कैसे धन और संपत्ति के पीछे भागने की होड़ में लोग अपने मानवीय मूल्यों और पारिवारिक दायित्व को भूल जाते हैं। आज चाची का शव चार दिनों से अस्पताल में छोड़ दिया गया है जो मानवीय संवेदनाओं की कमी दर्शाता है। पारिवारिक कलह और पैसों के लालच ने रिश्ते की अहमियत खत्म कर दी है। और इस गंभीर स्थिति में भी लोग एक दूसरे का साथ नहीं दे रहे हैं। जिससे मृत व्यक्ति के सम्मान और अंतिम संस्कार पर भी असर पड़ रहा है। मानवता धर्म कहता है कि संपत्ति किसी के साथ नहीं गया है वह तो हाथ का मेल है। लेकिन मानवता कर्तव्य बनता है मृतक सरस्वती देवी का शव को जल्द से जल्द अस्पताल से निकाल कर अंतिम संस्कार के लिए परिवार के सदस्यों रिश्तेदारों को आगे आना होगा।
रिपोर्टर - राकेश कुमार बच्चू

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