चांदन प्रखंड क्षेत्र के बिरनिया पैक्स चुनाव को लेकर गांव का माहौल हुआ उत्सवी

बांका : बांका जिले के चांदन प्रखंड  के बिरनिया पैक्स चुनाव को लेकर प्रखंड क्षेत्र में उत्सवी माहौल है। उम्मीदवार अपने समर्थकों के साथ सुबह-सुबह ही मतदाता पर्ची लेकर गांव की गलियों में पहुंच कर बिना चाह के चाकरी , दुख -सुख में शामिल, उनकी हाल-चाल की जानने की उत्सुकता, गांव घर में ग्रामीण की आवश्यकता जानने के क्रम में उसकी निदान हेतु अधिकारियों से मोबाइल संपर्क कर दर्शाते हुए अपने-अपने जन समर्थन के साथ प्रचार प्रसार तेज कर दिए हैं। हालांकि पब्लिक सब जानती है। लेकिन उम्मीदवार क्षेत्र भ्रमण के दौरान उस मतदाता  से किस व्यक्ति का अच्छा संबंध है, उसे साथ लेकर संपर्क कर रहे हैं। मतदाताओं का रिश्तेदार को बुलाकर साथ लेकर चल रहे हैं। जो मतदाता बाहर में काम करने चले गए हैं , उन्हें बुलाने के साथ-साथ सभी तरह की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। ताकि चुनाव वक्त मेरे पक्ष में चुनाव हो। प्रचार- प्रसार के दौरान, मतदाताओं के घर रिश्तेदारों का आगमन भी खूब हो रही है। जिसे कहीं किसी रिश्तेदार को फायदा हो रहा है। तो कहीं रिश्तेदार को  अकारण विशेष खानपान में विशेष खर्ची भारी में पड़ रहे हैं।
       जन संवाद कार्यक्रम के तहत सी न्यूज़ भारत के रिपोर्टर पैक्स में धान अधिप्राप्ति के दौरान समस्या एवं किसानों का लाभ पर विभिन्न प्रकार का चर्चा कर जानने की कोशिश की गई। लेकिन किसी किसान ने किसी उम्मीदवार का शिकायत नहीं किया। बल्कि सभी किसानों ने कहा हम पब्लिक सब जानते हैं। सुबह से शाम तक चुनाव ही करते हैं। पैक्स के चुनाव में उम्मीदवारों का चयन कर लेंगे।
         चांदन बिरनिया पैक्स में क्षेत्र भ्रमण के दौरान ग्रामीणों से बातचीत के तहत अध्यक्ष पद के लिए चार भावी प्रत्याशी मैदान में आ रहे हैं। 6 फरवरी  मतदान होगा। 21 जनवरी से नामांकन शुरू है। लेकिन नामांकन के पूर्व भावी प्रत्याशी अब तक के जनसंपर्क में प्रचार प्रसार के दौरान सभी प्रत्याशी रेस में हैं। लेकिन मतदाताओं के समक्ष बातचीत के दौरान क्षेत्र के मतदाता भाइयों ने कहा, पैक्स एक सरकारी संस्था है। लेकिन प्रबंध कार्यकारिणी सदस्यों की नामांकन की परिदृश्य का चिंतन किया जाय, और दूसरी तरफ मतदाता सूची देखा जाय,  वास्तविक में इस वार बिरनिया पैक्स अध्यक्ष पद का चुनाव मतदाता भाइयों ने गंभीरता पूर्वक चिंतन किया,तो परिणाम निश्चित कुछ और हो सकती है। इस बार के चुनाव में कहीं कछुआ एवं खरगोश का खेल नहीं हो जाय।

रिपोर्टर - राकेश कुमार बच्चू 

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