चांदन डुमरथर गांव में 75 साल के पिता को बेटों ने घर से निकाला

बांका : जिन बेटों की परवरिश के लिए पिता ने न जाने कौन-कौन से जतन किए होंगे। आज उनके तीन बेटों ने 75 साल की उम्र में उन्हें घर से निकाल दिया। कभी जिस बेटे के जन्म पर पिता ने खुशियां मनाई होगी। उसी पिता को उम्र के इस पड़ाव पर दो जून की रोटी के लिए दर-ब-दर भटकना पड़ रहा है। शर्मसार कर देने वाली यह घटना चांदन प्रखंड क्षेत्र के डूमरथर गांव की है।
         तीन-तीन बेटों के जुल्म का शिकार हो रहे हैं 75 वर्षीय हरि कापरी। 2 माह से बेटों ने उनका खाना पीना देना भी बंद कर दिया है। इतने से भी मन नहीं भरा तो धक्का मुक्का कर घर से निकाल दिया है।
        डूमरथर के ग्रामीणों ने बताया कि हरि कापरी ने कभी अपनी जिंदगी में खुशनुमा दिन भी देखे थे। उनके पास ढाई बीघा  जमीन थी। हारिकापुरी खेती करते और तीन बेटों के साथ खुशी से रहते थे। स्थितियां उनकी तब बदल गई जब शरीर थकने लगा। इसी बीच जीवन संगिनी ने भी छोटे पुत्र के मौह में फंसकर साथ छोड़ दिया। बुढ़ापे के दौर में अपनी पत्नी के कहने पर है खेती-गृहस्थी हरि कापरी के हाथों से निकाल कर बेटों के पास चली गई। हरि कापरी के तीन बेटों के बीच जमीन का बंटवारा कर दिया गया। जमीन का कुछ हिस्सा अपने पास रखा। लेकिन पिछले दिनों बेटों ने उसे भी जबरन बंटवाना चाह रहा है। अब हरि कापरी की मुश्किलें बढ़ती चली जा रही है।
      गुरुवार को चांदन थाना पर अपनी पीड़ा सुनते हुए हरि कापरी फफक पड़े।हरी कापरी ने कहा कि उन्होंने सपने में भी यह नहीं सोचा था की तीन-तीन बेटे के रहते हुए मुझे दो वक्त की रोटी के लिए दर-दर की ठोकरे खाने पड़ेगी। भगवान मुझे दुनिया से उठा लेता तो अच्छा होता। इतना कहते रहते उनकी आंखें डबडबा गई। हरि कापरी ने बताया कि पिछले दो माह से सरपंच ने तीन बेटों को मंथली के हिसाब से खिलाने को कहा था। लेकिन  बेटों ने जीवन यापन के लिए उन्हें फुटी कोड़ी भी  नहीं देने को तैयार हुआ। उल्टे आने जाने के क्रम में अपनी मां के द्वारा भद्दी भद्दी  गाली गलौज सुनने को मिल रहा है।
      चांदन थाना के अनि छोटा बाबू  राहुल कुमार  ने कहा कि बेटों को बुलाकर खाने पीने एवं रहने  की व्यवस्था करने के लिए कहा जाएगा। अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

रिपोर्टर : राकेश कुमार बच्चू 

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