पंचायत में मुखिया का वार्ड सदस्यों से कैसा संबंध है चुनाव में मायने रखेगा
बांका - त्रिस्तरीय पंचायती राज में प्रारंभिक स्तर की संस्था, ग्राम पंचायत का सबसे महत्वपूर्ण संस्था है। प्रखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत की निर्वाचित प्रतिनिधियों की एक ऐसी संस्था है, या कहिए जनप्रतिनिधियों की पहचान है जिसे क्षेत्र की जनताओं से आमने-सामने रूबरू होकर सवाल जवाब करते हुए उसकी मांग एवं वार्ड सदस्यों की सहमति के आधार पर विकास कार्य में अधिकांश कार्यकलापों का निर्णय लेने में पहले उनकी सहमति लेनी है। तभी क्षेत्र का विकास होता है। इस बार के पंचायत चुनाव में मुखिया और वार्ड सदस्यों का आपसी संबंध मायने रखेगा। वार्ड सदस्यों और मुखिया की बीच आपसी संबंध जीत और हार तय करने में एक बेहद निर्णायक भूमिका निभायेगा।
इस बार के चुनाव में यदि पिछले कार्यकाल में मुखिया ने वार्ड सदस्यों को नजरअंदाज किया होगा। या उनके वार्ड में काम नहीं होने दिया होगा, तो चुनाव में वैसे वार्ड सदस्य मुखिया के खिलाफ खुलकर विरोध करेंगे। इससे मुखिया का रिपोर्ट कार्ड खराब होगा। ऐसी स्थिति में चांदन प्रखंड के कई ग्राम पंचायत में चुनावी वार्ड सदस्यों के साथ गठबंधन और गुटबाज़ी से वोटो में बिखराव रहेगा। वैसे कई पंचायत में देखने को मिला कि फंड बंटवारे को लेकर मुखिया की आमसभा बैठक में कार्यकारिणी सदस्यों के द्वारा बहिष्कार किया जा रहा था। जिससे 3 साल तक उसे क्षेत्र में विकास का कार्य काफी धीमी रही। बीडीओ बीपीआरओ एवं डीडीसी के हस्तक्षेप के बाद भी बात नहीं बनी। ऐसी स्थिति में उसे क्षेत्र की मुखिया को इस बार चुनावी मैदान में कूदने पर लोहे की चना चबाने के बराबर होगी।
कई ग्राम पंचायत क्षेत्र के वार्ड सदस्यों ने कहा कि मेरा क्षेत्र में मुखिया और वार्ड सदस्यों के बीच ताल मेल नहीं रहने के कारण, क्षेत्र में विकास हुआ ही नहीं है। ऐसी स्थिति में जनता के बीच मुखिया की मनमानी का उजागर एवं क्षेत्र की कूव्यवस्था पर आने वाले चुनाव में बृहद रूप से चर्चा होगी। जिससे मुखिया के छवि पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।
रिपोर्टर - राकेश कुमार बच्चू

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