अनुदेशकों में खुशी की लहर, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
बाराबंकी : उत्तर प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 25 हजार अनुदेशकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है। अदालत ने अनुदेशकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ₹17,000 मानदेय को वर्ष 2017 से अब तक एरियर सहित भुगतान करने का आदेश दिया है। इस निर्णय के बाद प्रदेश भर के अनुदेशकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच, जिसमें जस्टिस पंकज मित्तल व जस्टिस एस.वी.एन. भाटी ने कहा कि अनुदेशकों का 10 वर्षों से अधिक का अनुभव देखते हुए सरकार को उनके नियमितीकरण की दिशा में भी आवश्यक निर्देश दिए जाते हैं। इसे अनुदेशकों की अब तक की सबसे बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उच्च प्राथमिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन बाराबंकी के मीडिया प्रभारी राजीव कुमार साहू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से अनुदेशकों को सच्चा न्याय मिला है। अनुदेशक पिछले 13 वर्षों से अल्प मानदेय में पूरी निष्ठा और ईमानदारी से सेवाएं दे रहे। आज उनके घरों में दिवाली जैसा माहौल है। वहीं अनुदेशक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष अंकित तिवारी ने न्यायपालिका का आभार जताते हुए कहा कि यह फैसला न केवल आर्थिक राहत देगा, बल्कि अनुदेशकों के सम्मान और भविष्य को भी सुरक्षित करेगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक निर्णय से प्रदेश के 25 हजार अनुदेशकों और उनके परिवारों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही है। वर्षों से चले आ रहे संघर्ष को आज न्याय की मंज़िल मिल गई।
रिपोर्टर : नफीस अहमद


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