शाबान की पंद्रहवीं रात मग़फ़िरत और रहमत की रात है : मौलाना मोहम्मद अंसार जामई

बाराबंकी : जमीयत उलेमा-ए-हिंद के तत्वावधान में ज़ैदपुर के बड़ा पूरा स्थित जामा मस्जिद में “फ़ज़ाइल-ए-शबे-बरात एवं इस्तक़बाल-ए-रमज़ान” विषय पर एक विशाल धार्मिक सभा का आयोजन किया गया। सभा को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता मौलाना मोहम्मद अंसार जामई (ख़ज़ानची, जमीयत उलेमा-ए-हिंद उत्तर प्रदेश) ने कहा कि शाबान का महीना अत्यंत फज़ीलत और बरकत वाला है। विशेषकर इसकी पंद्रहवीं रात, जिसमें अल्लाह तआला अपने बंदों की ज़िंदगी, मौत, रोज़ी और साल भर के मामलों का फ़ैसला फ़रमाता है और असंख्य लोगों की मग़फ़िरत करता है। उन्होंने बताया कि इस रात अल्लाह तआला सभी बंदों को माफ़ फ़रमाता है। सिवाय मुशरिक, दिल में बैर रखने वाले, माता-पिता की नाफ़रमानी करने वाले, शराब के आदी, व्यभिचार करने वाले और टखनों से नीचे पायजामा पहनने वालों के। ऐसे लोगों पर अल्लाह की नाराज़गी रहती है। मौलाना अंसार जामई ने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने हमेशा कौम और मिल्लत के हित में उल्लेखनीय सेवाएँ दी हैं। वर्तमान समय में संगठन चाहता है कि नौजवान शारीरिक और बौद्धिक रूप से मज़बूत हों, ताकि आवश्यकता पड़ने पर देश और धर्म की रक्षा के लिए डटकर खड़े हो सकें। इसी उद्देश्य से जमीयत द्वारा नशाखोरी जैसी घातक बुराइयों से युवाओं को बचाने और उन्हें शिक्षा की ओर प्रेरित करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि समय के साथ चलना ज़रूरी है, लेकिन आस्था से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता।

सभा के विशिष्ट वक्ता मौलाना सैयद अज़हर क़ासमी (नाज़िम-ए-तालीमात, जामिया दारुर्रशाद, बंकी) ने कहा कि शाबान का महीना दरअसल रमज़ानुल मुबारक के स्वागत का महीना है। हज़रत मुहम्मद इस महीने में इबादत का विशेष ध्यान रखते थे। अधिक से अधिक रोज़े रखते और नफ़्ल, ज़िक्र व अज़कार में मशगूल रहते थे। इससे इस महीने की महानता स्पष्ट होती है। उन्होंने कहा कि हमें भी रमज़ान की तैयारी के तौर पर नमाज़ों की पाबंदी, नफ़्ल इबादत, क़ुरआन की तिलावत और ज़िक्र में वृद्धि करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि शबे-बरात की इबादतें फ़र्ज़ नहीं हैं—इबादत करने पर सवाब है और न करने पर कोई गुनाह नहीं। इसलिए इस विषय पर आपसी आलोचना या निंदा उचित नहीं है। उन्होंने इस रात को फ़ुज़ूल और ग़लत कार्यों में बिताने को निंदनीय बताते हुए इसकी क़द्र करने की अपील की।
कार्यक्रम की शुरुआत क़ारी मसीहुर्रहमान मज़ाहिरी (संस्थापक व प्रबंधक, जामिया रहमानिया ज़ीनतुल क़ुरआन, रामपुर कटरा) की क़ुरआन तिलावत से हुई।कार्यक्रम की सरपरस्ती हाजी मोहम्मद शुऐब अंसारी ने की। नेतृत्व हाफ़िज़ फ़ज़ील अहमद (महतमिम, मदरसा जामिया अरबिया इमदादुल उलूम, ज़ैदपुर) ने किया तथा अध्यक्षता मुफ़्ती अब्दुल हलीम मज़ाहिरी ने की।
मौलाना जमाल क़ासमी की संचालन में आयोजित इस सभा में मौलाना क़ारी इम्तियाज़ुल हक़ क़ासमी, मौलाना मोहम्मद उमर मज़ाहिरी, क़ारी मोहम्मद शरीफ़ अंसारी, मास्टर ज़फ़रुल हसन अंसारी, क़ारी मोहम्मद ज़ुबैर (इमाम जामा मस्जिद), हबीबुर्रहमान (मोअज़्ज़िन), सईदुर्रहमान अंसारी, मोहम्मद ज़मीर, मोहम्मद जुनैद, मोहम्मद जावेद सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। नात व मनक़बत हाफ़िज़ मोहम्मद रवाहा और मोहम्मद हमीद ने पेश की। मेहमानों का स्वागत क़ारी सईदुद्दीन और फ़रीदुद्दीन अंसारी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन नज्मुल हसन अंसारी ने किया।
रिपोर्टर : नफीस अहमद

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