ग्राम बांसा में खालिक अंसारी के मत्स्य पालन फ़ार्म का जिला मत्स्य अधिकारी ने फीता काट कर किया उद्घघाटन

बाराबंकी : मछली पालन (मत्स्य पालन) किसानों के लिए कम लागत और अधिक मुनाफे वाला लाभकारी व्यवसाय बनकर उभरा है। पारंपरिक खेती से हटकर अब बड़ी संख्या में किसान मत्स्य पालन के माध्यम से समृद्धि की ओर बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत 40 से 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलने से यह व्यवसाय तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।उक्त विचार रविवार को ग्राम पंचायत बांसा निवासी खालिक अंसारी द्वारा लगभग 4 एकड़ भूमि में स्थापित मत्स्य पालन फार्म के उद्घाटन अवसर पर जिला मत्स्य अधिकारी अच्छेलाल निषाद ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ग्रामीण अंचलों में आजीविका के नए अवसर सृजित कर रही है। जिससे ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भर बन रहे हैं। इसी योजना के अंतर्गत खालिक अंसारी ने अपनी चार एकड़ भूमि का सदुपयोग करते हुए बायोफ्लॉक तकनीक से मत्स्य पालन हेतु आधुनिक तालाब का निर्माण कराया है। यह तालाब पूरी तरह वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित है। जिसमें जल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बायोफ्लॉक शीट, ऑक्सीजन मशीन, सबमर्सिबल पंप तथा जनरेटर जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। क्षेत्र में मत्स्य पालन के प्रति जागरूकता फैलाने वाले मछली चिकित्सक डॉ. सुरेश कुमार ने कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र में नीली क्रांति लाने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई है। जिसका लक्ष्य उत्पादन बढ़ाना, निर्यात को दोगुना करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।बायोफ्लॉक तकनीक के माध्यम से मछली पालन कर किसान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इस अवसर पर एबिश फिश कंपनी के रीजनल मैनेजर राजेश मिश्रा, रंजन कुमार, हिमांशु, ब्रजेश कुमार (मत्स्य पालक), समाजसेवी मतलूब अंसारी, विधायक प्रतिनिधि रिजवान संजय, ग्राम प्रधान मुबीन सिकंदर, अनिल वर्मा, इरशाद अंसारी, ऐजाज अंसारी,कामिल खान, इमरान किदवई, इरशाद मलिक सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

रिपोर्टर : नफीस अहमद

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