एफ्टीन फाइल्स में नाम होने के कारण ब्लेकमेलिंग हो रहे नेता ईरान में नरसंहार का विरोध नहीं कर पा रहे: रणधीर सिंह सुमन

बाराबंकी : एफ्टीन फाइल्स में भारतीय राजनैताओ के नाम होने के कारण ब्लेकमेलिंग हो रहे नेता ईरान में जनता के नरसंहार का विरोध नहीं कर पा रहे हैं तथा अमरीका उन्हें कठपुतली की तरह नचा रहा है। यह बात भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा आयोजित प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए राज्य परिषद रणधीर सिंह सुमन ने कहा । ईरानी जनता के नरसंहार के खिलाफ पार्टी दारा आयोजित प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए पार्टी सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि अंग्रेजों की गुलामी से आजादी के बाद नेता में संविधान की व्यवस्था द्वारा जनता द्वारा चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकारें बनी और देश के विकास एवं जनता की खुशहाली के प्रयास हुए और साथ में भारत की सरकारों की विदेश नीति एवं कूट-नीति के द्वारा विश्व में भारत को मान-सम्मान और शांति एवं अहिंसा का दूत माना जाता रहा है।राज्य परिषद सदस्य परवीन कुमार ने कहा कि देश को मजबूरन कई युद्ध भी लड़ने पड़े, और सोवियत संघ जैसे मित्र देशों ने भारत का खुलकर साथ दिया। जिसके चलते पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्रीमती इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में देश ने पकिस्तान के दो टुकड़े किये, ज्ञात हो तब अमेरिका पाकिस्तान की मदद कर रहा था। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री ने अमेरिका को कड़ा जवाब दिया था। पार्टी के कोषाध्यक्ष शिव दर्शन वर्मा ने कहा कि देश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई हैं, तब से प्रधानमंत्री ने लगभग हर मित्र और शत्रु देशों का दौरा किया और देश में प्रचार किया गया की मोदी जी का डंका विश्व में बज रहा है। वास्तविकता ठीक इसके विपरीत है। चीन हमारे देश की जमीन कब्ज़ा कर रहा है। और सरकार मौन है। हाल ही में भारतीय सेना द्वारा पकिस्तान के विरुद्ध आपरेशन सिन्दूर किया गया, सीजफायर हुआ और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पचासों बार दावा किया।किसान सभा अध्यक्ष-विनय कुमार सिंह ने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध मैंने रोकवाया, विपक्ष ‌द्वारा बार-बार यह पूछा गया कि ट्रम्प ऐसा क्यों कह रहे हैं। उसे यह अधिकार किसने दिया। परन्तु सरकार के जिम्मेदार मंत्री चुप्पी सधि पह, इसके बाद ट्रम्प द्वारा भारत पर रूस से सस्ता कच्चा तेल आयात नहीं करने को लेकर दबाव बनाया गया और भारत द्वारा अमेरिका को सामान निर्यात करने पर टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर देने की धमकी दी जाती रही, और भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल का आयात कम कर दिया। हाल ही में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमला किया गया, वहां के राष्ट्राध्यक्ष की हत्या की गयी, भारत सरकार ने इस पर भी रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। जबकि कई मौकों पर ईरान ने भारत का साथ दिया है। अभी अमेरिका ने कहा है की ईरान युद्ध के चलते भारत रूस से कच्चा तेल आयात कर सकता है यह अनुमति केवल तीस दिन के लिए दी गयी है। सवाल यह है क्या भारत की संप्रभुता, नीतियों, स्वतंत्रता को अमेरिका के हाथों गिरवी रख दिया गया है।

रिपोर्टर : नफीस अहमद

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