प्रशासन की बड़ी कार्यवाही तालाब की भूमि को खाली कराया क्षेत्र में चर्चा
फतेहपुर (बाराबंकी) : प्रशासन आखिर कब जागता है—जब पानी सिर से ऊपर निकल जाता है? मंगलवार को तहसील प्रशासन ने सेंदर ग्राम स्थित अवैध रूप से संचालित ‘एक्वा पाम आयलैंड’ को खाली तो करा दिया, लेकिन इस कार्रवाई ने कई ऐसे तल्ख सवाल खड़े कर दिए हैं जिनका जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है।
नायब तहसीलदार अंकिता पांडेय की निगरानी और कोतवाल बेचू सिंह यादव की मौजूदगी में यह कार्रवाई हुई। टापू पर कब्जा जमाए लोगों को अपना सामान हटाने के लिए दो दिन का समय दिया गया है। एसडीएम कार्तिकेय सिंह ने स्पष्ट किया कि सेंदर का यह तालाब अब भूमि प्रबंधक समिति को सौंप दिया गया है और इस पर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप पूरी तरह अवैध माना जाएगा।
लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है। जब यह तालाब केवल मछली पालन के लिए पट्टे पर दिया गया था, तो फिर आखिर किसकी शह पर यहां एक पूरा ‘टूरिस्ट स्पॉट’ खड़ा हो गया? दो सालों तक खुलेआम होटल, वाटर बोटिंग, पार्क और मनोरंजन के तमाम साधन चलते रहे, और जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे रहे। क्या प्रशासन को यह सब दिखाई नहीं दे रहा था, या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा था?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां दूर-दूर से लोग घूमने आते थे और उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी। यानी सरकारी तालाब को निजी कमाई का जरिया बना दिया गया था। सवाल यह भी है कि इस अवैध कारोबार से किस-किस की जेब गर्म हो रही थी?
आज जब कार्रवाई हुई तो सख्ती दिखाई गई, लेकिन क्या यह सख्ती समय पर नहीं होनी चाहिए थी? अगर शुरुआत में ही रोक लगा दी जाती, तो न तो सरकारी जमीन का दुरुपयोग होता और न ही अवैध निर्माण इस हद तक बढ़ पाता।
यह मामला सिर्फ एक तालाब का नहीं, बल्कि उस सिस्टम का आईना है जहां बिना संरक्षण के इतना बड़ा अवैध खेल संभव ही नहीं। अब जरूरत है कि जिम्मेदारों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, वरना ऐसे ‘आइलैंड’ फिर कहीं और उग आएंगे और प्रशासन सिर्फ कार्रवाई का ढोंग करता रह जाएगा।
रिपोर्टर : नफीस अहमद

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