मुसलमान सभी की भलाई करने वाली क़ौम है: मौलाना अमीनुल हक़ क़ासमी

बाराबंकी :  देश और मिल्लत की सुरक्षा एवं अस्तित्व के लिए जमीयत उलेमा-ए-हिंद का इतिहास सदैव गौरवशाली रहा है। देश की आज़ादी में जमीयत के वरिष्ठ नेताओं (अकाबिरीन) ने अत्यंत समर्पण और उत्साह के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देश के ज्वलंत मुद्दोंह के समाधान तथा रचनात्मक एवं संगठनात्मक कार्यों को सकारात्मक दिशा देने में जमीयत उलेमा-ए-हिंद हमेशा अग्रणी रही है। उक्त विचार जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश के नाज़िम-ए-आला, मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह क़ासमी, नाज़िम मदरसा महमूदिया अशरफुल उलूम, कानपुर ने मदरसा शहाबुल उलूम, शहाबपुर, बाराबंकी में आयोजित एक विचार विमर्श बैठक को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।मौलाना क़ासमी ने कहा कि मुसलमान सभी की भलाई करने वाली क़ौम है।जमीयत उलेमा की मजबूती के लिए स्थानीय और ज़िला इकाइयों का संगठित एवं सशक्त होना अत्यंत आवश्यक है। केंद्रीय नेतृत्व और प्रांतीय पदाधिकारियों की यह सोच है कि सभी इकाइयाँ रचनात्मक, शैक्षिक, कल्याणकारी तथा सामाजिक सेवाओं को व्यवस्थित ढंग से संचालित करें और संगठनात्मक ढाँचे को मजबूत बनाएँ। इसी उद्देश्य से प्रांतीय पदाधिकारी सभी ज़िलों का दौरा कर रहे हैं तथा संगठन को सुदृढ़ बनाने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय एवं सजग करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा के कार्यकर्ता स्थानीय स्तर पर प्रत्येक सप्ताह, तहसील स्तर पर प्रत्येक पंद्रह दिन तथा ज़िला स्तर पर प्रत्येक माह परामर्श बैठक आयोजित करें और अपने कार्यों की समीक्षा करें। साथ ही दीनी तालीमी बोर्ड, समाज सुधार समिति, आदर्श मस्जिद योजना के अंतर्गत दर्स-ए-क़ुरआन, दर्स-ए-हदीस, मकतब कीय स्थापना तथा सद्भावना, जन विकास, जेम (JEM) और रफ़ीक़ जैसे विभागों को भी सक्रिय रूप से स्थापित किया जाए। उल्लेखनीय है। मौलाना सैयद अज़हर क़ासमी ने अपने प्रारंभिक संबोधन में जमीयती एवं संगठनात्मक कार्यों के लाभ तथा जमीयत उलेमा-ए-हिंद के उद्देश्यों पर संक्षिप्त प्रकाश डालते हुए कहा कि इस्लाम, इस्लामी प्रतीकों (शआइर-ए-इस्लाम) की रक्षा तथा देश की अखंडता और सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास करना जमीयत उलेमा का मूल मिशन है।

रिपोर्टर : नफीस अहमद

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