बाराबंकी के नगीने का लोकार्पण, पूर्वजों की विरासत को सहेजना समय की जरूरत : प्रो. डॉ. अब्बास मेहदी
बाराबंकी : पूर्वजों की शैक्षिक,साहित्यिक,सामाजिक एवं सामुदायिक सेवाओं को लिखित रूप में संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुँचाना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। "बाराबंकी के नगीने" जैसी महत्वपूर्ण पुस्तक का संपादन कर डॉ. अबरारुल हक़ उस्मानी ने न केवल एक ऐतिहासिक दायित्व निभाया है, बल्कि जनपद की अमूल्य विरासत को सहेजने का सराहनीय कार्य किया है। अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनके नैतिक एवं चारित्रिक निर्माण पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।ताकि वे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त कर सकें। ये विचार पैरामेडिकल कॉलेज के कुलपति प्रो. डॉ. अब्बास मेहदी ने देसियां होटल, बाराबंकी में डॉ. ए.एच. उस्मानी की पुस्तक "बाराबंकी के नगीने" के लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ हाफ़िज़ यूसुफ़ साहब द्वारा पवित्र कुरआन के पाठ से हुआ। इसके बाद अतिथियों का पुष्पगुच्छ, शॉल एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मान किया गया। आमिर उस्मानी एवं अम्मार उस्मानी ने अतिथियों का स्वागत किया।
लेखक डॉ. अबरारुल हक़ उस्मानी ने पुस्तक की रचना-प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसके निर्माण में डॉ. अनवर हुसैन ख़ान एवं डॉ. मख़मूर काकोरवी का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता ज़ुबैर अहमद अंसारी ने की।उन्होंने कहा कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए बाराबंकी के इतिहास और विशिष्ट व्यक्तित्वों का महत्वपूर्ण दस्तावेज़ सिद्ध होगी। डॉ. अनवर हुसैन ख़ान ने इसे शोधपरक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण कृति बताया, जबकि डॉ. मख़मूर काकोरवी ने कहा कि पुस्तक में बाराबंकी की 30 विशिष्ट हस्तियों के जीवन, शिक्षा, साहित्यिक, सामाजिक एवं सामुदायिक योगदान का प्रामाणिक और विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है।प्रो. हकीम अरशद अली ने कहा कि पूर्वजों के जीवन-वृत्त को संरक्षित करना समाज के लिए प्रेरणा का कार्य है।इकरामुल हक़ उस्मानी ने बच्चों के संस्कार और चरित्र निर्माण पर बल देते हुए अपने छोटे भाई की उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त की। वरिष्ठ साहित्यकार अख्तर जमाल उस्मानी ने कहा कि सोशल मीडिया पर बिखरी सामग्री को पुस्तक का रूप देकर डॉ. उस्मानी ने ऐतिहासिक कार्य किया है। डॉ. एस.एम. हैदर ने उनकी साहित्यिक एवं सामाजिक प्रतिबद्धता की सराहना की। जबकि मौलाना मिनहाज आलम नदवी ने उनकी धार्मिक, शैक्षिक एवं सामाजिक सेवाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।कार्यक्रम के गद्य सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार फ़ज़ल इनाम मदनी ने किया। इसके पश्चात डॉ. मख़मूर काकोरवी की अध्यक्षता तथा सगीर नूरी के संचालन में आयोजित मुशायरे में प्रो. आमिर क़दवाई, ख़लील अहसन, इमरान अली आबादी, उस्मान मीनाई, अदील मंसूरी, अज़्म गोंडवी सहित अनेक शायरों ने अपना चयनित कलाम प्रस्तुत किया।समारोह में परवेज़ अहमद, मोहम्मद असगर उस्मानी, तारिक़ जिलानी, मोहम्मद मूसा ख़ान, सर्वेश सिंह, हुमायूँ नईम ख़ान, सैयद मोहम्मद हारिस, चौधरी मोहम्मद काशिफ़ एडवोकेट, जावेद मलिक एडवोकेट, मोहम्मद सादिक़ (सभासद), मोहम्मद मुस्तफ़ा ख़ान, चौधरी शोएब सहित साहित्य, शिक्षा एवं समाजसेवा से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिक, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।
रिपोर्टर : नफीस अहमद
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