जियोबैग स्टड, स्पर, रिवेटमेंट, स्लोप पिचिंग एवं परक्यूपाइन कार्यों से नदी की मुख्य धारा का प्रवाह हुआ नियंत्रित

बाराबंकी - जनपद बाराबंकी बाढ़ की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील जनपद है। इस वर्ष सरयू (घाघरा) नदी दिनांक 06 अगस्त 2026 से 09 अगस्त 2026 तक एल्गिन ब्रिज पर खतरे के जलस्तर 106.070 मीटर से लगातार ऊपर प्रवाहित होती रही तथा पुनः 16 अगस्त 2026 से खतरे के स्तर से ऊपर प्रवाहित हो रही है। इस दौरान नदी का अधिकतम डिस्चार्ज 4,35,559 क्यूसेक तथा एल्गिन ब्रिज पर नदी का अधिकतम जलस्तर 106.570 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के स्तर से लगभग 50 सेंटीमीटर अधिक है। इस संबंध में अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड, बाराबंकी शशिकांत सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा बाढ़ पूर्व संवेदनशील स्थलों पर समय से कराए गए तट संरक्षण कार्यों का वर्तमान बाढ़ के दौरान सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। इन कार्यों के परिणामस्वरूप नदी की मुख्य धारा के प्रवाह को नियंत्रित करने में सहायता मिली तथा पूर्व में कटान की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील रहे ग्रामों एवं तटबंध को सुरक्षा प्राप्त हुई।

प्रदेश सरकार द्वारा बाढ़ पूर्व कराए गए तट संरक्षण कार्यों का दिखा प्रभाव

अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड ने बताया कि विगत बाढ़ में सरयू (घाघरा) नदी के दायें किनारे पर एल्गिन ब्रिज के अपस्ट्रीम में स्थित बबुरी, हेतमापुर, कुसौरा एवं तिवराइनपुरवा तथा डाउनस्ट्रीम में स्थित कोरिनपुरवा, सनावां, तेलवारी, कलहंशपुरवा, कोठरी, सुबेदारपुरवा एवं अतरसुईया आदि ग्राम नदी की कटान की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा बाढ़ 2025 से पूर्व ग्राम बबुरी, हेतमापुर आदि में कटान से सुरक्षा के लिए जियोबैग स्टड, परक्यूपाइन एवं तीन स्पर का निर्माण कराया गया। इसी प्रकार ग्राम कुसौरा के समीप चार स्पर एवं रिवेटमेंट के निर्माण कार्य पूर्ण कराए गए।उन्होंने बताया कि वर्तमान वर्ष की बाढ़ से पूर्व ग्राम कुसौरा के समीप तीन स्पर के निर्माण तथा तिवराइनपुरवा के समीप जियोबैग से पिचिंग एवं परक्यूपाइन लगाए जाने के कार्य भी समय से पूर्ण करा लिए गए।इन तट संरक्षण कार्यों के पूर्ण होने से नदी की मुख्य धारा का प्रवाह दायें किनारे से बायें किनारे की ओर होने लगा, जिसके परिणामस्वरूप संबंधित ग्राम एवं तटबंध नदी की कटान से सुरक्षित रहे।

डाउनस्ट्रीम के संवेदनशील ग्रामों की सुरक्षा के लिए भी समय से कराए गए कार्य

अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड ने बताया कि एल्गिन ब्रिज के डाउनस्ट्रीम में स्थित कोरिनपुरवा, कलहंशपुरवा, कोठरी, सुबेदारपुरवा एवं अतरसुईया आदि ग्रामों की सुरक्षा के लिए भी प्रदेश सरकार द्वारा बाढ़ पूर्व जियोबैग से स्टड, स्लोप पिचिंग एवं परक्यूपाइन आदि लगाने के कार्य समय से पूर्ण कराए गए।इन कार्यों के फलस्वरूप उक्त ग्राम नदी की कटान से सुरक्षित रहे और नदी के जलस्तर में वृद्धि के बावजूद इन संवेदनशील क्षेत्रों में कटान का प्रभाव न्यूनतम रहा।

तट संरक्षण कार्यों से नदी की मुख्य धारा का प्रवाह हुआ नियंत्रित

शशिकांत सिंह ने बताया कि बाढ़ पूर्व संवेदनशील स्थलों पर जियोबैग स्टड, स्पर, रिवेटमेंट, स्लोप पिचिंग एवं परक्यूपाइन संबंधी कार्य समय से पूर्ण कराए जाने से नदी की मुख्य धारा के प्रवाह को दायें किनारे से बायें किनारे की ओर करने में सहायता मिली।उन्होंने बताया कि सरयू नदी का जलस्तर खतरे के स्तर से लगभग 50 सेंटीमीटर ऊपर तथा अधिकतम डिस्चार्ज 4,35,559 क्यूसेक दर्ज होने के बावजूद पूर्व में कटान की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील रहे ग्राम एवं तटबंध सुरक्षित हैं तथा जनपद में बाढ़ की स्थिति वर्तमान में सामान्य एवं पूर्णतः नियंत्रण में बनी हुई है।अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड ने बताया कि बाढ़ खंड के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा संवेदनशील स्थलों एवं तटबंधों की लगातार निगरानी भी की जा रही है।

रिपोर्टर - हयातुर्रहमान 

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