विकास खंड फतेहपुर के गांवों में बिना रिचार्ज बंद पड़े सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
बाराबंकी - फतेहपुर ग्रामीण क्षेत्रों में अपराध पर अंकुश लगाने और गांवों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ग्राम पंचायतों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे अब रखरखाव और समय से रिचार्ज न होने के कारण सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। विकास खंड फतेहपुर की कई ग्राम पंचायतों में भी सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। लाखों रुपये की लागत से लगाए गए इन कैमरों का उद्देश्य गांव के प्रमुख स्थानों और सार्वजनिक मार्गों पर निगरानी रखना था, लेकिन इंटरनेट रिचार्ज और तकनीकी रखरखाव के अभाव में सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ग्राम पंचायतों में ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को विद्यालयों, पंचायत भवनों, प्रमुख चौराहों और गांव के प्रवेश मार्गों पर स्थापित किया गया था। इन कैमरों के माध्यम से चोरी, छिनैती, मारपीट और अन्य आपराधिक घटनाओं की स्थिति में पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद थी। लेकिन कैमरों का समय से रिचार्ज न होने के कारण कई जगह निगरानी व्यवस्था ठप है। ग्रामीणों का कहना है कि *कैमरे लगने के बाद यदि उनका नियमित रिचार्ज और रखरखाव ही नहीं किया जाएगा तो योजना पर खर्च किया गया सरकारी धन किस काम का?* गांवों में आपराधिक घटनाओं के बाद सीसीटीवी फुटेज पुलिस के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, लेकिन कैमरे बंद होने से घटना के बाद जांच में भी परेशानी हो सकती है।ग्रामीणों ने बताया कि कैमरों के संचालन के लिए इंटरनेट कनेक्शन और समय-समय पर रिचार्ज जरूरी है। इसके बावजूद जिम्मेदार स्तर से इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई स्थानों पर कैमरे लगे तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उनकी निगरानी और रिकॉर्डिंग व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है या नहीं, इसकी नियमित जांच भी नहीं हो रही है। *सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल*
सीसीटीवी कैमरों के बंद होने से ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में चोरी और अन्य घटनाओं की रोकथाम के लिए लगाए गए कैमरे यदि चालू रहें तो अपराधियों में भय बना रहेगा। वहीं कैमरे बंद होने की स्थिति में असामाजिक तत्वों के हौसले बढ़ने की आशंका रहती है। ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी और जिला प्रशासन से विकास खंड फतेहपुर की सभी ग्राम पंचायतों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों का *भौतिक सत्यापन कराने, बंद कैमरों की सूची तैयार करने, इंटरनेट रिचार्ज कराने और खराब उपकरणों की तत्काल मरम्मत कराने* की मांग की है। सवाल यह भी है कि ग्राम पंचायतों में कैमरे लगाने के बाद उनके नियमित संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है और कैमरे बंद रहने की स्थिति में इसकी जवाबदेही किस अधिकारी या कर्मचारी की तय होगी। ग्रामीणों का कहना है कि केवल कैमरे लगाकर योजना पूरी मान लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें 24 घंटे सुचारु रूप से संचालित रखना भी उतना ही जरूरी है।
रिपोर्टर - नफीस अहमद
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