कथा सुनने से मन को शांति ओर अध्यात्मिक विकास होता है शिव भगवान शास्त्री मधुर
मसौली/बाराबंकी : ग्राम पंचायत बड़ागांव के मोहल्ला नालीपार स्थित मंदिर परिसर में चल रही तीन दिवसीय भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास शिव भगवान शास्त्री मधुर जी ने राजा परीक्षित की कथा सुनाई।कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कथा व्यास ने कहा कि श्रीमदभागवत कथा के सुनने से मन को शांति आध्यात्मिक विकास और सकारात्मक परिवर्तन आता हैं। उन्होंने कहा कि भगवान की कथा व्यक्ति को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है और जीवन में सुख समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है। राजा परीक्षित की कथा सुनाते हुए उन्होंने बताया कि एक बार राजा परीक्षित शिकार के लिए वन में गए। प्यास लगने पर वह जल की तलाश करते हुए शमीक ऋषि के आश्रम पहुंचे। ऋषि उस समय ध्यान में लीन थे और राजा के जल मांगने पर कोई उत्तर नहीं दे सके। इसे राजा ने अपना अपमान समझ लिया और क्रोध में पास पड़े मृत सर्प को धनुष की नोक से उठाकर ऋषि के गले में डाल दिया।जब शमीक ऋषि के पुत्र ऋंगी ऋषि को घटना की जानकारी हुई तो उन्हें राजा परीक्षित पर क्रोध आ गया। उन्होंने मंत्रोच्चार के साथ जल का संकल्प लेकर राजा परीक्षित को श्राप दिया कि सातवें दिन तक्षक सर्प के डसने से उनकी मृत्यु होगी। कथा के समापन अवसर पर कथा व्यास शिव भगवान शास्त्री को समाजसेवी नासिर अली, बृजेश वर्मा, नरेंद्र चौहान और मास्टर राकेश कश्यप ने अंगवस्त्र व दक्षिणा देकर सम्मानित किया। इस मौके पर कमेटी अध्यक्ष शेषनारायण यादव, उपाध्यक्ष दीपक यादव, कोषाध्यक्ष अभिषेक चौहान सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे।
रिपोर्टर : नफीस अहमद
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