साहित्यिक गोष्ठी में उर्दू अदब और नई पीढ़ी के शायरों को प्रोत्साहन देने पर जोर
फतेहपुर/बाराबंकी : गत रात्रि सैयद कलीम नईमी के आवास पर एक साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की सरपरस्ती सैयद अहमद नईमी ने की, जबकि अध्यक्षता उस्ताद शायर राही सिद्दीकी ने की। कार्यक्रम का संचालन हस्सान साहिर ने किया। गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व जिला पंचायत सदस्य नसीम गड्डू, पत्रकार जावेद अख्तर, पप्पू मलिक और जावेद यूसुफ ने शिरकत की। इस अवसर पर सैयद अहमद नईमी ने उस्ताद-ए-शोअरा राही सिद्दीकी का गुलपोशी कर स्वागत किया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में राही सिद्दीकी ने कहा कि आज की इस महफिल में आकर उन्हें बेहद खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि करीब तीस वर्ष पहले वह इसी स्थान पर मरहूम मौलाना असगर नईमी साहब के बुलावे पर साहित्यिक बैठकों में आया करते थे। मौलाना असगर नईमी उन्हें अपनी दुआओं से नवाजते थे और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआ किया करते थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सैयद अहमद नईमी और सैयद कलीम नईमी आगे भी इसी तरह साहित्यिक गोष्ठियों का आयोजन करते रहेंगे।मुख्य अतिथि नसीम गड्डू ने कहा कि इस तरह की साहित्यिक महफिलें उर्दू के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसी बैठकों से नई पीढ़ी के शायरों को बहुत लाभ मिलता है और उन्हें आगे बढ़ने का हौसला मिलता है। उन्होंने कहा कि हर उर्दू प्रेमी को चाहिए कि वह इस तरह की साहित्यिक महफिलों का आयोजन करे और नई पीढ़ी के शायरों की हौसला-अफजाई करे।
गोष्ठी में शायरों ने अपना कलाम पेश कर उपस्थित लोगों को देर रात तक बांधे रखा। पेश किए गए अशआर नज़र-ए-करीब हैं۔
निगाह-ए-यार से हम ज़ख्म खाए जाते हैं
तड़प रहे हैं मगर मुस्कुराए जाते हैं
अहमद सईद ‘हर्फ़’
मासूम परिंदे करें बातें ये क़फ़स में
क्या हाल ख़ुदा जाने ये सय्याद करेगा
हस्सान साहिर
मशवरा मुझको दिया तुम भी जलाओ एक चराग़
और चुपके से हवा को भी इशारा कर दिया
हसन नईम फ़तेहपुरी
प्यार मोहब्बत उल्फ़त बांटूं लोगों में
भूल से भी न दिल आज़ारी किया करो
मतीउल्लाह हुसैनी
मुझको छूने की ज़िद उसे और मैं
आसमां हूं ज़मीं नहीं साहब
शादाब अनवर
आंसुओं की मय बनी हर ज़ख्म पैमाना बना
तब कहीं जाकर मेरा दिल एक मयखाना बना
इमरान सहबा
मुकद्दर तो देखो ज़रा मेरा शब्बू
पटक कर मुझे तेरे भाई ने मारा
जावेद कुंवारा
गोष्ठी में पत्रकार रिजवान मुनीर, इंजीनियर इकबाल सिद्दीकी, इंजीनियर मसूद अहमद, रेहान कुरैशी, सरताज आलम, सद्दाम मंसूरी सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
रिपोर्टर : नफीस अहमद
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