भगत सिंह को मार सकते है लेकिन उनके विचारो को नहीं-सुमन
बाराबंकी : सिक्ख कांउसिल आफ इंड़िया के तत्वाधान मे शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती पर समारोह का आयोजन शहर के लैय्या मण्डी स्थित काउंसिल कार्यालय पर किया गया। सर्वप्रथम शहीदे-ए-आजम भगत सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर समारोह की शुरुआत की गई। तत्पश्चात उनके त्याग और विचारों को याद कर भगत सिंह के संघर्ष, बलिदान और युवाओं में राष्ट्रप्रेम जगाने के विचारों पर चर्चा की गई। समारोह की अध्यक्षता प्रधान सरदार जसबीर सिंह बग्गा ने की। संचालन उप प्रधान अमरजीत सिंह कालरा ने किया। इस मौके पर वरिष्ठ अधिवक्ता रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि भगत सिंह को मार सकते है लेकिन उनके विचारो को नही मारा जा सकता। उनके शरीर को कुचला जा सकता है। लेकिन उनकी आत्मा को कुचलने मे कोई भी सक्षम नही होगा। इस मौके पर अधिवक्ता भूपिन्दर पाल सिंह शैन्की ने कहा कि भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के बंगा गांव में किशन सिंह और विद्यावती के घर हुआ। उन्होंने आजादी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में हुए भीषण नरसंहार जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड को भला कौन भूल सकता है। इस कांड ने भगत सिंह को अंदर तक झकझोर दिया था। उनके अंदर बस एक ही बात थी सिर्फ और सिर्फ मुल्क की आजादी। कैसे भी हो लेकिन अब बस मुल्क आजाद होना चाहिए। लाहौर के नेशनल कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर भगत सिंह ने भारत की आजादी के लिये नौजवान भारत सभा की स्थापना की थी। इस मौके पर जुबेर अंजुम खान, सलाम मोहम्मद, आसिफ अहमद खान, हरविंदर सिंह कली, आसिफ अंसारी, सरदार गुरमीत सिंह रिंकू, शैलेंद्र चोपड़ा, सरदार जितेंद्र सिंह मिंदे, संजय मिश्रा, एड़वोकेट सरदार त्रिपथ सिंह, आर.एन.चोपड़ा काके, सूरज बाजपेयी, लवकुश, फूल चंद्र वर्मा मौजूद रहे।
रिपोर्टर : नफीस अहमद

No Previous Comments found.