मौलाना की महान शैक्षणिक सेवाओं को पूरी दुनिया मानती है
फतेहपुर - बाराबंकी दारुल उलूम नदवतुल उलमा के निष्ठावान प्रबंधक इस्लामिक जगत की महान शैक्षणिक हस्ती और 'तहरीक-ए-नदवा' के वफादार संरक्षक मौलाना डॉ. सईद-उर-रहमान आज़मी नदवी के इंतकाल के दुखद हादसे पर दुनिया भर के शैक्षणिक और धार्मिक हलकों में गहरी शोक की लहर दौड़ गई है। दारुल उलूम फतेहपुर (बाराबंकी) के नाज़िम मौलाना अता-उर-रहमान नदवी ने अपने शोक संदेश में अत्यंत दुख व्यक्त करते हुए कहा कि हजरत मौलाना सईद-उर-रहमान आज़मी नदवी इस्लामिक जगत के ऊंचे दर्जे के बुजुर्ग आलिम-ए-दीन और दीन-ए-मतीन के सच्चे व्याख्याकार थे। उनका व्यक्तित्व सादगी, गरिमा और निष्ठा का सबसे (उज्ज्वल) व्यावहारिक प्रमाण था। आप एक ऐसी लोकप्रिय हस्ती थे, जिनकी बहुमूल्य सेवाओं को पूरी दुनिया स्वीकार करती है।
मौलाना अता-उर-रहमान नदवी ने मौलाना की सेवाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आगे कहा कि मौलाना सईद-उर-रहमान आज़मी नदवी का वजूद दारुल उलूम नदवतुल उलमा की परंपराओं और उसके बुजुर्गों की कार्यशैली का निचोड़ था। उन्होंने अपने आराम को ताक पर रखकर जिस दीवानगी और निष्पक्ष अंदाज में इस संस्थान की परवरिश की, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक रोशन प्रतीक और इतिहास का एक ऐसा चमकता हुआ अध्याय है जिसे हमेशा याद रखा जाएगा।
मौलाना सईद-उर-रहमान आज़मी नदवी का शुमार समकालीन युग की उन प्रमुख हस्तियों में होता था जिनके संबंध दुनिया भर के शैक्षणिक केंद्रों और ज्ञान के प्यासों तक फैले हुए थे। मसूफ ने ज्ञान के प्रकाश से न केवल अपने दौर को रोशन किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए वैचारिक और शैक्षणिक मार्गदर्शक सिद्धांत भी छोड़े। उनकी शैक्षणिक गहराई, अंतरराष्ट्रीय वैचारिक व्यापकता और अद्वितीय संगठनात्मक क्षमता ने दारुल उलूम नदवतुल उलमा को विश्व स्तर का और एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान बनाने में मुख्य भूमिका निभाई।
उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि मौलाना ने ज्ञान को केवल पारंपरिक किताबों और कक्षाओं तक सीमित रखने के बजाय इसे व्यावहारिक जीवन, दावत-ओ-इस्लाह (सुधार) और राष्ट्र निर्माण में आगे बढ़ाया। अरब और अजम के शैक्षणिक फलक पर आपका व्यक्तित्व एक ऐसा केंद्र था जहाँ दुनिया भर के विद्वान और शोधकर्ता अपनी प्यास बुझाते थे। आपके निधन से ज्ञान-कर्म और निष्ठा व ईमानदारी का एक चमकता हुआ अध्याय बंद हो गया है, और आपका पूरा जीवन (परहेजगारी), पवित्रता और कुरान की तिलावत से भरा हुआ था। मौलाना की धार्मिक सेवाओं का एक और प्रमुख पहलू यह भी है कि आपने पचास वर्ष से अधिक लंबे समय तक नदवा की मस्जिद में इमामत के (दायित्व) निभाए और इसके मंच को अपनी धाराप्रवाह और लंबी अरबी वक्ता-शैली से लगातार रौनक बख्शी। आपके भाषणों की गूंज इस संस्थान की स्थायी पहचान बनी रही। इसके अलावा, मौलाना छात्रों के लिए एक सच्चे आदर्श और समय के बहुत बड़े कदरदान थे। उसूलपसंदी, अनुशासन और समय की जो पाबंदी हजरत मोहतमिम साहब के व्यक्तित्व में नजर आती थी, उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। इस महान हादसे पर मौलाना अता-उर-रहमान नदवी ने अपने संदेश में मौलाना सईद-उर-रहमान आज़मी नदवी के परिवार और दारुल उलूम नदवतुल उलमा के नाज़िम मौलाना सैयद बिलाल अब्दुल हई हसनी नदवी सहित पूरे नदवी समुदाय के साथ-साथ उनके सफर और घर के विशेष साथियों, उनके दामाद मौलाना अब्दुल्ला मखदूम और मौलाना डॉ. मोहम्मद फरमान नदवी को भी विशेष रूप से शोक संवेदनाएं प्रेषित की हैं।
इस अचानक हुए निधन के हादसे पर देश और विदेश के प्रमुख उलेमा, राष्ट्रीय नेताओं और धार्मिक संस्थानों के जिम्मेदार लोगों में गहरा दुख पाया जाता है। दुनिया भर से शोक संवेदनाओं का सिलसिला जारी है, और बारगाहे-इलाही में दुआ की जा रही है कि अल्लाह ताला मरहूम की महान और शानदार सेवाओं को अपनी बारगाह में स्वीकार करे, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में उच्च से उच्च स्थान प्रदान करे, और दारुल उलूम नदवतुल उलमा, तमाम आश्रितों, छात्रों और दुनिया भर में फैले उनके सभी चाहने वालों को सब्र-ए-जमील की तौफीक अता फरमाए।
रिपोर्टर - नफीस अहमद

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