दुर्गा पंडाल में कवि सम्मेलन देशभक्ति और हास्य व्यंग्य की रचनाओं ने बांधा समां
बाराबंकी : शारदीय नवरात्र के अवसर पर मां दुर्गा के सजे पंडालों में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम है। इसी क्रम में कस्बा मसौली के मोहल्ला कटरा स्थित भवानी नीम चबूतरा पर मां दुर्गा पंडाल में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। ओज कवि दुष्यंत शुक्ल सिंहनादी की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में कवियों ने देशभक्ति सामाजिक सरोकार और हास्य व्यंग्य से ओतप्रोत रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि सुभाष चंद्र ने ये सोच लिया हमने कि वो काम करेंगे, दुनिया में पिताजी का बड़ा नाम करेंगे’ सुनाकर उत्साह का संचार किया। कोटवाधाम के आनंद कौशल ने मर जाऊं, मिट जाऊं, देश पर न आंच आए, देश के नाम यह जवानी लिखता हूं’ के माध्यम से राष्ट्रप्रेम की भावना व्यक्त की। वहीं निर्भय निश्छल ने फूफा बदनाम है केवल, असली खेल बुआ करती है’ सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। कवि सम्मेलन के अध्यक्ष दुष्यंत शुक्ल सिंहनादी ने बुजदिल है वो मानव जिसमें देशप्रेम का ज्वार नहीं, वह कायर है जिसको अपनी मातृभूमि से प्यार नहीं’ सुनाकर राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया। वंदना अनम ने मेरे अहसास ढीले हो रहे हैं, नयन के कोर गीले हो रहे हैं’ के जरिए भावनाओं को शब्दों में पिरोया। आसिम काकोरवी ने मुझमें खंजर नहीं उतारा है, उसने आंखों से मुझको मारा है’ सुनाकर अपनी काव्य प्रतिभा का परिचय दिया। इसी क्रम में सूर्य प्रकाश त्रिपाठी ने उस मां पर हम क्या लेख लिखें, खुद ईश्वर जिसके लिए तरसे’ रचना प्रस्तुत की। श्याम जी कौशल ने आए हैं मुझको कायदा बताने वाले, मुर्दों का कफन बेचकर खाने वाले’ सुनाकर समय की परिस्थितियों पर कटाक्ष किया जबकि सत्याम अवस्थी ने यहां जिस आदमी को ज्ञान होगा, उसी का मान और सम्मान होगा’ के माध्यम से ज्ञान की महत्ता बताई। कवियों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों पर पंडाल तालियों से गूंजता रहा। धार्मिक आयोजन के बीच आयोजित साहित्यिक संध्या ने श्रद्धालुओं और काव्यप्रेमियों का मनोरंजन करने के साथ सामाजिक एवं राष्ट्रीय चेतना का संदेश भी दिया। इस अवसर पर कमेटी अध्यक्ष रतन प्रकाश वर्मा, कोषाध्यक्ष विंधेश्वरी वर्मा, विद्या प्रसाद, बीनू वर्मा, शिवम, देवीशंकर सोनी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
रिपोर्टर : नफीस अहमद

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