दुर्गा पूजा समिति की ओर से आयोजित किया गया भव्य कवि सम्मेलन

फतेहपुर, बाराबंकी :  बसौली गांव में बुधवार रात दुर्गा पूजा समिति की ओर से आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में हास्य, व्यंग्य, प्रेम, सामाजिक सरोकार और मां-बाप के प्रति सम्मान जैसे विषयों पर कविताएं प्रस्तुत की गईं। कवियों की शानदार प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने तालियां बजाकर उत्साहवर्धन किया। कवयित्री हेमा पांडेय ने मां वीणावादिनी की वंदना करते हुए काव्य पाठ की शुरुआत की। उन्होंने पढ़ा, ‘आज हेमा की हेमा सुनो वंदना।’ आनंद कौशल ने अपनी रचना ‘तुमको अच्छा लगता है तो अंगारों की बात लिखो’ के माध्यम से श्रोताओं का ध्यान खींचा। योगेंद्र योगी ने हास्यपूर्ण अंदाज में पढ़ा, ‘पल भर में ही जीवन साथ बिताएंगे, दस-नब्बे पर फोटो साथ खिंचाएंगे। कवयित्री वंदना अनम ने गांव और रिश्तों से जुड़ी संवेदनाओं को शब्द देते हुए सुनाया, ‘गांव का कोना-कोना आंगन भूल गए, सौंधे वादे करके साजन भूल गए।’ कवि सचिन कुमार ‘अक्स’ ने प्रेम की भावना को व्यक्त करते हुए पढ़ा, ‘इधर देखना है, उधर देखना है, जिधर तुम छुपी हो उधर देखना है।’ वंदना विशेष ने माता-पिता की सेवा का संदेश देते हुए कहा, ‘अगर हो शबरी तो प्रभु राम मिलते हैं, करो मां-बाप की सेवा तो चारों धाम मिलते हैं।

डॉ. ओम शर्मा ‘ओम’ ने बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा पर तीखा व्यंग्य करते हुए पढ़ा, ‘कैसे खुद को वो ढाल लेते हैं, बूढ़े मां-बाप को भगाकर लोग कुत्तों को पाल लेते हैं।’ उनकी पंक्तियों ने श्रोताओं को सोचने पर मजबूर किया। हेमा पांडेय ने संघर्ष और मेहनत को बयां करते हुए सुनाया, ‘मेरे घर के निवाले देखना तुम, मेरे पैरों के छाले देखना तुम।’ कार्यक्रम का संचालन कर रहे सौरभ जायसवाल ने वैवाहिक जीवन पर हास्यपूर्ण रचना सुनाकर खूब मनोरंजन किया।
वहीं लोकेश त्रिपाठी ने पढ़ा, ‘चीज कोई नहीं दूसरी चाहिए, बात जिसकी हुई थी वही चाहिए।’ कवि सम्मेलन में प्रस्तुतियों के दौरान श्रोताओं ने तालियों के साथ कवियों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम ने धार्मिक आयोजन के बीच साहित्यिक और सांस्कृतिक माहौल को जीवंत बना दिया।

रिपोर्टर : नफीस अहमद

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