बज़्म-ए-अज़ीज़ की माहाना तरही नशिस्त में शायरों ने पेश किया उम्दा कलाम

बाराबंकी : उस्ताद शायर अलहाज नसीर अंसारी साहब के नबीगंज स्थित आवास पर बज़्म-ए-अज़ीज़ की माहाना तरही नशिस्त का आयोजन किया गया। नशिस्त का मिसरा-ए-तरह ‘ढूंढती है जबीं दयार कोई’ रहा। मोहतरम अख़्तर जमाल उस्मानी साहब ने महफ़िल की सदारत की, जबकि सूफ़ी शायर हुज़ैल अहमद हुज़ैल ने निज़ामत के फ़रायज़ अंजाम दिए। महफ़िल में मेहमान-ए-ख़ुसूसी के तौर पर अफ़सर बाराबंकवी, ज़मीर फ़ैज़ी, मोहसिन क़िदवई और एस.एम. हैदर साहब ने शिरकत की। इसके अलावा शहर और आसपास के कई नामचीन शायरों ने अपने कलाम पेश कर महफ़िल को यादगार बनाया। तरही नशिस्त में शायरों ने अपने अशआर के ज़रिए मोहब्बत, ज़िंदगी की हक़ीक़त, इंसानी रिश्तों, मुफ़लिसी, समाजी हालात और इंसान की बेबसी जैसे मौज़ूआत को ख़ूबसूरती से पेश किया। श्रोताओं ने पसंदीदा अशआर पर ख़ूब दाद दी।

महफ़िल में पेश किए गए कुछ चुनिंदा अशआर इस तरह रहे—

नसीर अंसारी
हमसफ़र भेज किरदिगार कोई
बेसहारा है बे दयार कोई

ज़मीर फ़ैज़ी
कर के दिल में मेरे दरार कोई
छीन कर ले गया क़रार कोई

मोहसिन क़िदवई
चुन रहा है चमन में ख़ार कोई
आने वाली है क्या बहार कोई

अफ़सर बाराबंकवी
यूं चुभन सी जिगर में होती है
तीर हो जैसे आर-पार कोई

हुज़ैल अहमद हुज़ैल
दरगुज़र कीजिए ख़ुदा के लिए
बात गुज़रे जो नागवार कोई इनके अलावा नज़र मसौलवी, आरिफ़
मास्टर इरफ़ान बाराबंकवी,अदील मंसूरी,अज़्म गोंडवी,नफ़ीस बाराबंकवी,मुख़्तार फ़ारूक़ी,आदर्श बाराबंकवी,चटक चौखण्डवी,राशिद रफ़ीक़ चौखण्डवी,हकीम हाफ़िज़ मोहम्मद यूसुफ़,लतीफ़ बाराबंकवी,सरवर किंतूरी,सहर अय्यूबी,सबा जहांगीराबादी,तालिब आलापुरी,शुएब कामिल शहाबपुरी, अज़ीम मशाएख़ी, चमन खेवलवी, शम्स ज़करियावी, नईम सिकंदरपुरी, जासिम किंतूरी समेत अन्य शायरों ने भी अपने कलाम पेश किए। सभी शायरों के अशआर पर श्रोताओं ने दाद देकर उनका हौसला बढ़ाया। नशिस्त के समापन पर बज़्म-ए-अज़ीज़ के बानी और सदर उस्ताद शायर अलहाज नसीर अंसारी साहब ने तमाम शायरों और श्रोताओं का शुक्रिया अदा किया। साथ ही अगली माहाना तरही नशिस्त के लिए मिसरा ‘अपना चमन बशक्ल-ए-बियाबां है इन दिनों’ तय किए जाने का ऐलान किया।
रिपोर्टर : नफीस अहमद

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