रिचार्ज और रखरखाव के अभाव में शोपीस बने ऑपरेशन त्रिनेत्र के कैमरे

मसौली - बाराबंकी ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई ऑपरेशन त्रिनेत्र योजना के तहत ग्राम पंचायतों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे रिचार्ज और रखरखाव के अभाव में शोपीस बनकर रह गए हैं। अधिकांश कैमरे बंद होने से निगरानी व्यवस्था प्रभावित हो रही है वहीं ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। बताते चलें कि करीब दो से तीन वर्ष पूर्व जिले की ग्राम पंचायतों और उनके मजरों में प्रमुख तिराहों चौराहों तथा सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इनका उद्देश्य अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाने के साथ ही संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना था। कैमरों को ग्राम प्रधानों के मोबाइल से भी जोड़ा गया था ताकि निगरानी की जा सके।शुरुआत में कैमरों से निगरानी की व्यवस्था सुचारु रही लेकिन बाद में देखरेख के अभाव में स्थिति बिगड़ती चली गई। ग्रामीणों के अनुसार इंटरनेट और सिम रिचार्ज समाप्त होने तथा तकनीकी खामियों के चलते कई कैमरे छह से आठ माह से बंद पड़े हैं। कुछ स्थानों पर करीब एक वर्ष से रिचार्ज नहीं कराया गया है। सोलर पैनल से संचालित कैमरों में भी तकनीकी समस्याएं बताई जा रही हैं। कैमरों के बंद होने से सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली गतिविधियों की रिकॉर्डिंग नहीं हो पा रही है।इससे पुलिस को घटनाओं की जांच में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कैमरे चालू रहें तो चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। लोगों ने संबंधित विभाग और ग्राम पंचायतों से कैमरों की मरम्मत कराने तथा नियमित रिचार्ज की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी धन खर्च कर लगाए गए कैमरों की देखरेख पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में सुरक्षा के उद्देश्य से शुरू की गई योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी मामले का संज्ञान लेकर बंद कैमरों को दोबारा चालू कराने के लिए ठोस कदम उठाएं।

रिपोर्टर - नफीस अहमद

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