बेशकीमती लकड़ी की सुरक्षा पर सवाल,आखिर कहां और कैसे हो रही निगरानी?
बाराबंकी : आंधी,बारिश और तेज हवाओं के दौरान बंकी ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत फतेहसराय व आसपास के गांवों में किसानों के खेतों में यूकेलिप्टस समेत अन्य प्रजातियों के पेड़ गिर गए थे। अब वन विभाग इन पेड़ों को कटवाकर लकड़ी को जहांगीराबाद में एक स्थान पर एकत्र करा रहा है। लेकिन बेशकीमती लकड़ी को डंप करने और उसकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि लकड़ी को किसी सुरक्षित सरकारी स्थान पर रखकर उसकी निगरानी क्यों नहीं की जा रही,ताकि चोरी या अनियमितता की आशंका न रहे। मामले में जब पत्रकारों ने ठेकेदार राजू ठाकुर से लकड़ी की कटाई और उसे ले जाने के संबंध में सवाल किए,तो आरोप है कि वह संतोषजनक जवाब देने के बजाय विवाद पर आमादा हो गया और जानकारी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद पत्रकारों ने क्षेत्रीय वन दरोगा सतीश मिश्रा से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि खेतों से कटवाए गए पेड़ों की लकड़ी जहांगीराबाद में एकत्र की जा रही है और जल्द ही नीलामी कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीलामी से पहले लकड़ी किसी निजी व्यक्ति को नहीं बेची जाएगी।हालांकि हकीकत पर सवाल बरकरार है। कटी हुई सरकारी लकड़ी पर आमतौर पर नंबरिंग या पहचान चिन्ह लगाया जाता है, जो मौके पर पड़े लकड़ी के बोटों पर मौजूद नहीं है। इस संबंध में डीएफओ बाराबंकी से बात की गई तो उन्होंने कहा, "इसकी संपूर्ण जानकारी हमें नहीं है, साक्ष्य भेजिए, मौके पर जाकर जांच होगी और दोषी पाए जाने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।" अब लकड़ी की सुरक्षा, निगरानी और नीलामी की पारदर्शिता को लेकर वन विभाग की जिम्मेदारी अहम हो गई है।
रिपोर्टर : नफीस अहमद

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