जवाहर घाटी के 'खूनी मोड़' ने फिर ली जान, 4 दिनों के रेस्क्यू के बाद डैम से निकला चालक का शव
बरही : बरही थाना क्षेत्र अंतर्गत जवाहर घाटी स्थित तिलैया डैम पुल के समीप बुधवार की रात हुआ भीषण हादसा शनिवार को चालक का शव बरामद होने के साथ संपन्न हुआ। बरही थाना प्रभारी विनोद कुमार यादव के नेतृत्व में चले चार दिवसीय सघन सर्च ऑपरेशन के बाद एनडीआरएफ (NDRF) की टीम ने शनिवार दोपहर करीब 3 बजे जलमग्न ट्रक के चालक के शव को पानी से बाहर निकाला। घटना का विवरण विदित हो कि बीते बुधवार की रात्रि लगभग 10:30 बजे, मछली लदा एक ट्रक (संख्या AP 35X8299) जवाहर घाटी पुल के समीप तीखे मोड़ पर अनियंत्रित होकर सीधे डैम में जा गिरा। ट्रक पूरी तरह से जलमग्न हो गया था। घटना की सूचना मिलते ही बरही थाना प्रभारी विनोद कुमार यादव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और उसी रात से ही राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया।
4 दिनों की कड़ी मशक्कत और सफलता
प्रशासनिक तत्परता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शुक्रवार को भारी मशक्कत के बाद ट्रक को तो पानी से बाहर निकाल लिया गया, लेकिन चालक का कहीं पता नहीं चल सका। शनिवार को थाना प्रभारी की सूझबूझ से NDRF की टीम को बुलाया गया, जिन्होंने कड़ी मेहनत के बाद चालक के पार्थिव शरीर को खोज निकाला। स्थानीय लोगों ने थाना प्रभारी विनोद कुमार यादव और उनकी टीम के इस समर्पित प्रयास की सराहना की है।
NHAI की लापरवाही पर आक्रोश: "इंजीनियरिंग की बड़ी चूक"
इस हादसे ने एक बार फिर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों और वाहन चालकों का कहना है कि:
अत्यधिक तीखा मोड़:
पुल के पास का मोड़ इतना खतरनाक है कि आए दिन गाड़ियां अनियंत्रित होकर डैम में गिर रही हैं। पिछले 5-6 महीनों में यहाँ कई बड़े हादसे हो चुके हैं।
रेडियम मार्किंग की गलती:
चालकों ने बताया कि NHAI के इंजीनियरों ने 2 महीने पहले गति धीमी करने के लिए 25 रेडियम चिन्ह (Markers) लगाए, लेकिन इन्हें मोड़ के ठीक ऊपर लगा दिया गया। जानकारों का कहना है कि इन चिन्हों को मोड़ से कम से कम 500 मीटर पहले होना चाहिए था ताकि चालक पहले ही सतर्क हो सकें।
सुधार की गुंजाइश: ग्रामीणों के अनुसार, पुल के दूसरी ओर काफी जमीन उपलब्ध है। यदि NHAI चाहे तो रोड को सीधा कर इस जानलेवा घुमाव को कम किया जा सकता है, जिससे भविष्य में होने वाली मौतों को रोका जा सके।
निष्कर्ष: बरही पुलिस ने अपना कर्तव्य बखूबी निभाया, लेकिन अब सवाल NHAI के इंजीनियरों से है कि आखिर बार-बार हो रही इन मौतों के बाद भी सड़क की डिजाइन में सुधार क्यों नहीं किया जा रहा? क्या NHAI किसी और बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
रिपोर्टर : राहुल राणा

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