80 फीट सड़क बनी, लेकिन मांगरोल रोड अतिक्रमण में फंसी — फिर इस “विकास” का मतलब क्या?
बारा : Baran शहर की सबसे व्यस्त सड़क Mangrol Road आज विकास और प्रशासनिक व्यवस्था—दोनों पर सीधा सवाल खड़ा कर रही है। हाल ही में शहर में 80 फीट चौड़ी सड़क का निर्माण किया गया, लेकिन जब दूसरी ओर मांगरोल रोड पर हालात जस-के-तस बने हुए हैं, तो उस 80 फीट सड़क की वास्तविक उपलब्धता और उपयोगिता आखिर क्या रह जाएगी? हकीकत यह है कि Dharmada Chauraha से लेकर Mahatna Chauraha तक पूरे मार्ग पर दुकानदारों ने अपनी दुकानें 8 से 10 फीट तक सड़क पर निकाल रखी हैं—कहीं बिक्री का सामान फैला है, तो कहीं मेटल शोरूम और औद्योगिक इकाइयों ने लोहे-सरिया, शीट, पाइप और भारी सामग्री सीधे सड़क पर उतार कर रख दी है। यही नहीं, कई उद्योग और मेटल कारोबार सड़क को ही अपना स्टोरेज यार्ड बनाकर ट्रकों से उतरा माल घंटों-दिनों तक बाहर जमाए रखते हैं, जिससे सड़क की वास्तविक चौड़ाई काग़ज़ों में तो रहती है, लेकिन ज़मीन पर लगातार सिमटती जा रही है और रोज़ लगने वाला जाम अब सामान्य स्थिति बन चुका है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शहर की लगभग प्रमुख मेन-मार्केट सड़कों पर नियमित रूप से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाता है—नोटिस दिए जाते हैं और कार्रवाई भी होती है—लेकिन सबसे अधिक व्यस्त मंगरोल रोड हर बार इस अभियान से बाहर क्यों रह जाती है? जबकि यही मार्ग मंडी, बाजार और मेटल-उद्योग क्षेत्र का मुख्य रास्ता है, भारी वाहनों का दबाव यहीं सबसे ज़्यादा रहता है और आम नागरिक—मरीज, विद्यार्थी और कर्मचारी—यहीं सबसे अधिक परेशान होते हैं। सवाल सिर्फ दुकानों का नहीं है, सवाल उन बड़े-बड़े मेटल शोरूम और उद्योगों का भी है, जो खुलेआम सड़क पर माल फैलाकर यातायात को बाधित कर रहे हैं।
और इससे भी गंभीर पहलू यह है कि इसी मार्ग पर हाल ही में बनाए गए डिवाइडर को भी लगभग 80 -90फीट तक हटा दिया गया या गायब कर दिया गया है। एक तरफ सड़क चौड़ी करने के दावे, दूसरी तरफ उसी सड़क पर सुरक्षा और यातायात नियंत्रण के लिए बनाए गए ढांचे का इस तरह समाप्त हो जाना—यह कैसा विकास है? अगर “विकास की गंगा” बह रही है, तो वह आम जनता तक पहुँचने से पहले ही बीच रास्ते में क्यों सूख जाती है? सड़क बनने से पहले ही उसका हिस्सा खत्म हो जाना, क्या यह जवाबदेही पर सीधा प्रश्न नहीं है?
अब शहर की साफ और जायज़ मांग है कि मांगरोल रोड को तुरंत अतिक्रमण-मुक्त किया जाए, दुकानों द्वारा 8–10 फीट तक सड़क पर फैलाया गया व्यापार, तथा मेटल शोरूम और उद्योगों द्वारा सड़क पर रखा गया भारी माल तत्काल हटाया जाए, हाल ही में हटाए गए डिवाइडर सहित यातायात ढांचे को बहाल किया जाए और पूरे मार्ग पर स्थायी ट्रैफिक व्यवस्था लागू की जाए। क्योंकि बिना अतिक्रमण हटाए और बिना सड़क पर जमाए गए औद्योगिक सामान पर कार्रवाई किए, सड़क बनाना विकास नहीं—सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाता है।
रिपोर्टर : पंकज राठौर

No Previous Comments found.