मैक्स हॉस्पिटल, पटपड़गंज के डॉक्टरों ने बड़े हार्ट अटैक के बाद 27-वर्षीय युवक की बचाई जान
बरेली : बरेली मई 23 को एक उल्लेखनीय जीवनरक्षक उपचार में, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज के डॉक्टरों ने 27-वर्षीय युवक का सफलतापूर्वक इलाज किया, जिसे हार्ट की मुख्य धमनी (लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी) में गंभीर ब्लॉकेज के कारण बड़ा हार्ट अटैक आया था। यह कोरोनरी आर्टरी डिजीज के सबसे खतरनाक रूपों में से एक माना जाता है। मरीज में हृदय रोग के कोई ज्ञात जोखिम कारक नहीं थे। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज, के सी.टी.वी.एस विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. वैभव मिश्रा, के नेतृत्व में आपातकालीन बायपास सर्जरी की गई, जिससे मरीज की जान बचाई जा सकी।
मरीज राजेश मौर्य, जो बरेली के निवासी हैं, न तो धूम्रपान करते थे, न ही उन्हें डायबिटीज थी और न ही परिवार में हृदय रोग का कोई इतिहास था। सामान्य मानकों के अनुसार वह स्वस्थ थे और सामान्य जीवनशैली जी रहे थे। हालांकि, अचानक उन्हें सीने में असहजता और बेचैनी महसूस हुई। ऐसे लक्षण अक्सर युवा लोग नजरअंदाज कर देते हैं। मैक्स हॉस्पिटल, पटपड़गंज, में तत्काल जांच के दौरान डॉक्टरों ने उनकी लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी में गंभीर ब्लॉकेज की पहचान की। इस धमनी को आमतौर पर "विडो-मेकर आर्टरी" कहा जाता है, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा हार्ट अटैक का कारण बन सकती है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मैक्स हॉस्पिटल, पटपड़गंज, की मल्टीडिसिप्लिनरी कार्डियक टीम ने तुरंत इमरजेंसी कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्टिंग (CABG) सर्जरी की। सर्जरी सफल रही और मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ हो रहा है। यह मामला समय पर निदान और एडवांस कार्डियक उपचार के महत्व को दर्शाता है।
मामले के बारे में जानकारी देते हुए, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज, के सी.टी.वी.एस विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. वैभव मिश्रा, ने कहा, "युवा वयस्कों में हार्ट अटैक अब दुर्लभ नहीं रह गए हैं। हम लगातार 20 और 30 वर्ष की उम्र के मरीजों में गंभीर हृदय संबंधी समस्याएं देख रहे हैं, जिनमें डायबिटीज, धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर या पारिवारिक इतिहास जैसे पारंपरिक जोखिम कारक भी मौजूद नहीं होते। इस मामले में मरीज की लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी में गंभीर ब्लॉकेज था, जो जानलेवा स्थिति थी और जिसके लिए तत्काल सर्जरी जरूरी थी। समय पर निदान और तेजी से इलाज ने उनकी जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। युवाओं को सीने में दर्द, सांस फूलना, असामान्य थकान या अत्यधिक पसीना आने जैसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि इलाज में देरी जीवित बचने की संभावना को काफी कम कर सकती है।
डॉ. वैभव, ने आगे कहा, "एक आम धारणा है कि हृदय रोग केवल बुजुर्गों या स्पष्ट जोखिम कारकों वाले लोगों को प्रभावित करता है। लेकिन युवा अक्सर शुरुआती चेतावनी संकेतों को तनाव या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में जागरूकता बढ़ाना और समय पर मेडिकल जांच करवाना बेहद जरूरी है, क्योंकि शुरुआती हस्तक्षेप जीवन बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है।"
इस मामले की सफलता युवाओं में हृदय स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने, तेज आपातकालीन प्रतिक्रिया और एडवांस कार्डियक केयर के महत्व को रेखांकित करती है। मैक्स हॉस्पिटल, पटपड़गंज, के डॉक्टरों ने जोर देते हुए कहा कि नियमित हेल्थ चेकअप, तनाव प्रबंधन, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और असामान्य लक्षण दिखने पर समय रहते जांच करवाना हृदय रोग के जोखिम को कम करने के लिए बेहद जरूरी है।
रिपोर्टर : बी.एस.चन्देल


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