सेवा के धागों से समाज को जोड़ता एक नाम फरमान हसन खान फरमान मियां

बरेली : आज के दौर में जब सामाजिक कार्य भी मंच, पोस्टर और सोशल मीडिया की चमक में सिमटते जा रहे हैं, ऐसे समय में बरेली से एक अलग और असरदार सामाजिक सोच उभरकर सामने आई है काम पहले, पहचान बाद में। इस सोच का प्रतिनिधित्व करते हैं फरमान हसन खान, जो बिना शोर-शराबे के समाज की बुनियादी ज़रूरतों पर लगातार काम कर रहे हैं। फरमान हसन खान क़ाज़ी-ए-हिंदुस्तान मुफ़्ती असजद रज़ा ख़ान क़ादरी के दामाद हैं और वर्तमान में जमात-ए-रज़ा-ए-मुस्तफ़ा के जनरल सेक्रेटरी के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। धार्मिक और सामाजिक नेतृत्व से जुड़े इस परिवेश ने उनके व्यक्तित्व को केवल विचारों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सेवा को ज़मीनी स्तर पर उतारने की दिशा दी। यही कारण है कि वे समाज सेवा को किसी अभियान की तरह नहीं, बल्कि एक प्रणाली के रूप में देखते हैं जहां मदद प्रचार के लिए नहीं, जरूरत के आधार पर पहुंचती है।

सेवा को सिस्टम में बदलने की पहल
आला हज़रत ताजुश्शरिया वेलफेयर सोसाइटी के माध्यम से फरमान हसन खान ने समाज सेवा को इवेंट आधारित मॉडल से निकालकर एक निरंतर प्रक्रिया में बदला है। स्वास्थ्य शिविर हों या शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम, हर योजना का उद्देश्य यही है कि ऐसी व्यवस्था बने जिससे जरूरतमंदों को बार-बार मदद की गुहार न लगानी पड़े।

धार्मिक मंच बने सामाजिक प्रयोगशाला

जमात-ए-रज़ा-ए-मुस्तफ़ा में अपनी संगठनात्मक भूमिका के दौरान फरमान हसन खान ने धार्मिक आयोजनों को केवल रस्मों तक सीमित नहीं रखा। उर्स, रमज़ान और अन्य अवसरों पर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम जोड़कर उन्होंने यह स्पष्ट किया कि धार्मिक मंच समाज सुधार का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
दान नहीं, समाधान की सोच
फरमान हसन खान की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता है—राहत से आगे समाधान की ओर बढ़ना। जहां कई संस्थाएं इलाज या सहायता तक सीमित रह जाती हैं, वहीं उनकी टीम इलाज के बाद भी परिवारों को शिक्षा, काउंसलिंग और आजीविका से जोड़ने का प्रयास करती है। 

यही सोच स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास तीनों क्षेत्रों में दिखाई देती है।
युवाओं और महिलाओं पर विशेष ध्यान

इस सेवा मॉडल का केंद्र भविष्य की पीढ़ी है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, डिजिटल शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को केवल सहायता नहीं, बल्कि सही दिशा दी जा रही है। खासकर लड़कियों के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम सामाजिक ढांचे में चुपचाप लेकिन गहरा बदलाव ला रहे हैं।
पर्यावरण भी सामाजिक जिम्मेदारी
फरमान हसन खान की पहल में पर्यावरण संरक्षण केवल प्रतीकात्मक वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है। धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के साथ पौधारोपण को जोड़कर इसे सामूहिक जिम्मेदारी का रूप दिया गया है, जिससे लोग इसे अभियान नहीं, आदत के रूप में अपनाने लगे हैं।

उभरता ‘साइलेंट लीडरशिप’ मॉडल
फरमान हसन खान का काम एक नई नेतृत्व शैली को सामने लाता है—साइलेंट लीडरशिप। न भाषणों की राजनीति, न पोस्टरों की जरूरत, बल्कि लगातार और ईमानदार जमीनी काम। यही वजह है कि उनकी पहचान प्रचार से नहीं, भरोसे से बन रही है। बरेली से शुरू हुआ यह सेवा मॉडल इस ओर इशारा करता है कि आने वाले समय में सामाजिक बदलाव का रास्ता शोर से नहीं, बल्कि स्थिर और ईमानदार प्रयासों से निकलेगा। फरमान हसन खान इसी दिशा में बढ़ता हुआ एक महत्वपूर्ण नाम बनते जा रहे हैं।

रिपोर्टर : बी.एस. चन्देल
 

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