ज्ञान का बसंत

लघु कथा:

छोटे से गाँव में आरव नाम का एक बालक रहता था। उसे पढ़ाई में बिल्कुल मन नहीं लगता था। बसंत पंचमी का दिन आया। पूरे गाँव में पीले फूल खिले थे और मंदिर में माँ सरस्वती की पूजा की तैयारी चल रही थी।

आरव की दादी ने उससे कहा,
“बेटा, आज माँ सरस्वती का दिन है। उनसे ज्ञान और बुद्धि का आशीर्वाद माँगो।”

आरव अनमने मन से मंदिर चला गया। वहाँ उसने देखा कि उसके दोस्त ध्यान से पूजा कर रहे थे और किताबें माँ सरस्वती के चरणों में रखी थीं। तभी पुजारी जी ने कहा,
“बसंत केवल ऋतु का नहीं, मन में ज्ञान और अच्छे विचारों का भी होता है।”

यह बात आरव के मन को छू गई। उसने पहली बार सच्चे मन से माँ सरस्वती से प्रार्थना की और निश्चय किया कि वह मन लगाकर पढ़ाई करेगा।

धीरे-धीरे आरव का मन पढ़ाई में लगने लगा। समय के साथ वह विद्यालय का सबसे होनहार छात्र बन गया। उसे समझ आ गया कि सच्चा बसंत तब आता है जब मन में ज्ञान और संस्कार खिलते हैं।


 नैतिक शिक्षा :

ज्ञान और परिश्रम से ही जीवन में सच्चा विकास और उजाला आता है।

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