बस्तर महान भूमकाल स्मृति समापन दिवस मनाया।
दंतेवाड़ा - बस्तर महान भूमकाल स्मृति दिवस का शुभारंभ 4/2/2026 को ग्राम पंचायत हीरानार में उस स्थान पर पूजा अर्चना कर की गई जिस स्थान पर आदिकाल से वीर शहीद गुंडाधुर ने भूमकाल विद्रोह का आगाज किया था आज भी ग्रामीण उन्हें याद कर उस पवित्र स्थान को देवभूमि मानकर उसी स्थान से भूमकाल आंदोलन काआगाज करते हैं। कहा जाता है कि भूमकाल के महानायक स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिकारी अमर शहीद वीर गुंडाधुर के नेतृत्व में बस्तर के मूल निवासी अपने हक के लिए जल जंगल जमीन के लिए तथा अंग्रेजी हुकूमत से तंग आकर 1910 में संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी विद्रोह का मुख्य कारण अंग्रेजों द्वारा जंगल से बेदखल किया जाना, बिना परिश्रमी का कार्य कराना, जमींदारी प्रथा से जनता त्रस्त थी । अंग्रेजों द्वारा अपनी बहू बेटियों के इज्जत से खिलवाड़ करना यह सब भूमकाल विद्रोह का प्रमुख कारण था । अंग्रेजों द्वारा किए गए अत्याचारों का विरोध करते हुए वीर गुंडाधूर ने इस स्थान को भूमकाल विद्रोह के लिए चुना था । इस दिन ग्रामीणों द्वारा पारंपरिक शस्त्र तीर धनुष आदि हथियारों की विधिवत पूजा अर्चना कर उनके बलिदानों व कार्यों को याद किया गया इसी कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए दिनांक 7/2/ 2026 को हारम पारा गीदम में मुख्य चौक (वीर गुंडाधुर चौक) पर विधिवत पारंपरिक रूप से पूजा अर्चना की गई बुजुर्गों द्वारा बताया जाता है कि इसी दिन गुंडाधुर ने मुरियाराज स्थापना करने की घोषणा की थी । दिनांक 10 /2/ 2026 को बस्तर महान भूमकाल स्मृति दिवस जय स्तंभ चौक थाना के सामने दंतेवाड़ा में मनाया गया जिसमें सभी समाज के समाज प्रमुख गणमान्य नागरिक विभिन्न संगठनों के सदस्य युवा महिलाएं व बच्चे शामिल हुए इस कार्यक्रम में समाज के प्रमुखों व सदस्यों द्वारा भूमकाल दिवस की स्मृति में अपने विचार व्यक्त किए गए।दिनांक14/2/2026 ब्लाक कटेकल्याण में भूमकाल स्मृति दिवस मनाया गया ।भूमकाल आंदोलन का समापन दिनांक 22 /2/2026 को फुटबॉल ग्राउंड बैलाडीला बचेली में रखा गया बस्तर की धरती ने रविवार को एक बार फिर अपने गौरवशाली इतिहास को जीवंत कर दिया भूमकाल स्मृति दिवस की 116 वीं वर्षगांठ पर बैलाडीला बचेली में भव्य समापन समारोह हुआ हजारों की संख्या में पहुंचे आदिवासी समाज के लोगों ने अमर शहीद वीर गुंडाधुर को श्रद्धांजलि देते हुए उनके साथ शहीद हुए आदिवासी वीर क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी डेबरीधुर, रोडा पेदा ,धानु धाकड़ ,आयतु माहरा, मुंदी कलार ,बुटलू बुधुमाझी व अन्य शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई बुजुर्गों द्वारा बताया जाता है कि इस भूमकाल में 52 अमर शहीद हुए थे उनके बलिदानों को भी याद किया गया कार्यक्रम की शुरुआत बैलाडीला बचेली फुटबॉल ग्राउंड से एक विशाल रैली निकाली गई रैली में युवा महिलाएं बुजुर्ग और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि पारंपरिक वेशभूषा व अस्त्र-शास्त्र के साथ शामिल हुए पूरे मार्ग में भूमकाल जोहर व डाला मिरी नारों से वातावरण गूंज उठा यह रैली मुख्य मार्ग से होते हुए बैलाडीला बचेली के मुख्य चौक ( वीर शहीद गुंडाधुर चौक ) पहुंची चौक पर सेवा अर्जी व माल्या अर्पण के साथ पूजा अर्चना की गई पारंपरिक नेक नियमों के बीच समाज प्रमुख व सदस्य गणों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए उसके पश्चात एक कार्यक्रम का आयोजन फुटबॉल ग्राउंड में किया गया । इस कार्यक्रम में समाज प्रमुखों व सदस्यों द्वारा समाज उत्थान पर अपने विचार व्यक्त किए गए।
शहीदों के वंशजों का सम्मान समापन समारोह में क्रांतिकारी शहीदों के वंशजों को शाल श्रीफल और पारंपरिक सम्मान भेंट किया गया समाज के विभिन्न पदाधिकारी और जनप्रतिनिधियों ने युवाओं से इतिहास को जानने और संस्कृति व अस्मिता को बनाए रखने का आह्वान किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम पारंपरिक खेल और तीरंदाजी लोक नृत्य आदि कार्यक्रमों में सम्मिलित युवा कलाकारों वह विजेताओं को समाज द्वारा लगभग 45000 रुपए की नगद प्रोत्साहन राशि वितरित की गई व उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गई । इस कार्यक्रम में समस्त ग्रामों के बड़े बुजुर्ग गायता ,पेरमा, पटेल ,माटी पुजारी सिरहा, गुनिया व ग्राम के बड़े बुजुर्गों का भी श्रीफल व शाल भेंट कर सम्मान किया गया । इस ऐतिहासिक महान भूमकाल स्मृति दिवस कार्यक्रम में मूल बस्तरिया धुरवा समाज ,धाकड़ भतरा, मुरिया ,माडिया ,गोंड कोया, कलार ,राऊत ,हल्बा तेंलगा, माहरा ,घसिया, पनारा, गढ़वा, कुम्हार, लोहार परजा ,गदबा, सोनार दोरला समाज समाज के समाज प्रमुख एवं सदस्य गणों ने अपनी गरिमामय उपस्थिति दी सभी ने मिलकर राज्यपाल महोदय छत्तीसगढ़ शासन के नाम तहसीलदार बचेली को ज्ञापन सौंपा ज्ञापन में निम्न बिंदुओं पर मांग की गई ।
1-भूमकाल स्मृति दिवस पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सार्वजनिक अवकाश घोषित करें।
2- भूमकाल के महानायक स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिकारी अमर शहीद वीर गुंडाधुर के वीर गाथाओं एवं उनके द्वारा देश हित में किए गए कार्यों को छत्तीसगढ़ के शिक्षा पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाए।
3 - छत्तीसगढ़ के विशेष स्थान एवं जन कल्याणकारी स्थान का नाम अमर शहीद वीर गुंडाधुर के नाम से करें ।
4 - बस्तर के समस्त वन्य अभ्यारण का नाम अमर शहीद वीर गुंडाधुर के नाम से करें ।
5 - बस्तर की औद्योगिक नगरी एनएमडीसी बचेली किरंदुल नगरनार में स्थानीय आदिवासी बेरोजगारों के स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने हेतु प्रयास किए जाए।
6 - बस्तर की औद्योगिक नगरी एनएमडीसी बचेली किरंदुल नगरनार में होने वाले भर्ती को पांचवी अनुसूची के नियमानुसार स्थानीय भर्ती घोषित करें एवं रोक लगाए गए भर्ती को पुनः प्रारंभ किया जाए।
7- स्थानीय ग्रामीणों को ही ठेका श्रमिक कार्य के लिए लिया जाए।
8 - अन्य राज्यों से आए श्रमिकों से कार्य न लिया जाए।
9 - छत्तीसगढ़ राज्य शासन द्वारा जनकल्याणकारी ऐसी योजनाएं जो बंद पड़ी है उन्हें पुनः प्रारंभ किया जाए ताकि मूल
आदिवासियों का जीवन स्तर में सुधार हो सके। कार्यक्रम समापन में धुरवा समाज के जिला अध्यक्ष जयराम सिंह कश्यप , महेश स्वर्ण,संजय पंत,रामनाथ नेगी,कुरसोराम मौर्य,गणेश यादव,संतोष सेठिया,शिशुपाल,रैमोन मड़कामी,लखमा कोर्राम अजय शिवहरे,बादल बनर्जी,पुरुषोत्तम दुर्गा,गजेंद्र ताती,लछुराम उर्वशा,कुमारू तामों,रमेश यादव,कुमारू नाग हनुमान,रमेश भास्कर,संतोष नायर श्रीमती फूलमती नाग,श्रीमती राजमनी यादव,श्रीमती सांवरी,श्रीमती लक्ष्मी बघेल श्रीमती रूघनी कश्यप श्रीमती मीना कुंजाम व सभी समाज के प्रमुख जन मौजूद रहे। कार्यक्रम में सभी की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम में बस्तर संभाग के जगदलपुर,कोंडागांव,कांकेर,नारायणपुर,सुकमा,बीजापुर से आए हुए समाज के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों द्वारा भी अपने विचार व्यक्त किए गए। कार्यक्रम के माध्यम से बस्तर के गौरवशाली इतिहास समृद्ध संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी मूल समाज के अतुल्यनीय योगदान को याद करते हुए समाज में एकता,जागरूकता और स्वाभिमान का संदेश दिया गया।
रिपोर्टर - ए आर कर्मा

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