हत्या मामले में तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास और जुर्माना और तीन अभियुक्त को कोर्ट ने दोष मुक्त किया

बस्ती - विशेष सत्र न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम जितेंद्र गुप्ता की अदालत ने रंगदारी मांगने के लिए की गई हत्या के करीब छह वर्ष पुराने मामले में तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने  एक  दोषी को 1.10  और दो दोषी को  पर 1.12 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा न करने पर दो वर्ष सात माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। वहीं, तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दिलीप सिंह ने अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में घटना का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि छावनी थाना क्षेत्र के चौकड़ी गांव निवासी राहुल मिश्रा ने 12 जून 2020 को छावनी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अभियोजन के अनुसार,12 जून की शाम करीब छह बजे शिवा पाठक उर्फ बाहुबली निवासी डुहवा मिश्र, थाना छावनी, योगेश दुबे उर्फ चिंगारी निवासी बड़हर कला, थाना हर्रैया और उत्कर्ष सिंह निवासी तरना, थाना  हर्रैया    दो अज्ञात लोगों के साथ राहुल के घर पहुंचे थे। आरोप था कि आरोपियों ने राहुल के पिता अखिलेश मिश्रा से रंगदारी की रकम को लेकर बातचीत की। रकम देने से इनकार करने पर आरोपियों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।

शोर सुनकर बीच-बचाव करने पहुंचे राहुल के भाई अजीत मिश्रा को गोली मार दी गई। गंभीर रूप से घायल अजीत को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। विवेचना के दौरान पुलिस ने दोनों अज्ञात आरोपियों की पहचान अंकुर पांडेय निवासी भदासी, थाना हर्रैया और गोलू पांडेय उर्फ विवेक पांडेय निवासी शक्तिपुर, थाना छावनी के रूप में की। मामले में अनूप कुमार मिश्रा का नाम भी सामने आया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता शशि प्रकाश शुक्ला, विचित्रमणि उपाध्याय,  रमापति पांडेय, आलोक कुमार शुक्ला वकील ने  अनूप कुमार मिश्रा के तरफ से झूठ फसाई जाने का  कोर्ट में अपना तर्क दिया और श्याम नारायण मिश्र ने आरोपियों को झूठा फंसाए जाने का तर्क दिया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने शिवा पाठक, योगेश दुबे और उत्कर्ष सिंह को दोषी माना। अदालत ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए प्रत्येक पर 1.12 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया। वहीं, अंकुर पांडेय, गोलू पांडेय और अनूप मिश्र को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

रिपोर्टर - दीपक सोनी

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