जांच ही निष्पक्ष नहीं हुई तो सच कैसे सामने आएगा? सरपंच-सचिव को संरक्षण, उपयंत्री पर लापरवाही के आरोप

आठनेर :  यह सिर्फ एक शिकायत नहीं है, यह उस सिस्टम की कहानी है जहां जांच के नाम पर सच को दबा दिया जाता है और जिम्मेदारों को बचा लिया जाता है।

आठनेर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत आष्टी में मनरेगा योजना अंतर्गत कराए गए निर्माण कार्यों में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि तत्कालीन उपयंत्री की लापरवाही के कारण चेक डेम का निर्माण घटिया स्तर का हुआ, जिसकी नींव तक मजबूत नहीं बनाई गई। निर्माण स्थल का समय पर निरीक्षण भी नहीं किया गया, जिसका परिणाम यह हुआ कि विकास के नाम पर सिर्फ कागजी कार्यवाही पूरी की गई।
आवेदक विशाल भालेकर द्वारा जनसुनवाई में जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत प्रस्तुत कर जिला पंचायत बैतूल के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।
आरोप यह भी है कि ग्राम पंचायत आष्टी में नागोराव के खेत के पास बने चेक डेम में खेती की जा रही है, जबकि सुरेश के खेत के पास बना अर्धनिर्मित चेक डेम पहली ही बारिश में बह गया। इसके बावजूद जनपद पंचायत स्तर पर की गई जांच में सहायक यंत्री नितेश पानकर, उपयंत्री ठाकुर एवं अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी भरत सिंह द्वारा कागजों में सभी निर्माण कार्यों को पूर्ण दर्शाकर तत्कालीन उपयंत्री, सरपंच, सचिव एवं रोजगार सहायक को बचाने का प्रयास किया गया।
सरकार विकास के दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जनपद के अधिकारियों की मिलीभगत से जनता के टैक्स के पैसों का खुला दुरुपयोग किया जा रहा है। यह सिर्फ अनियमितता नहीं, बल्कि विश्वास के साथ धोखा है।
ग्राम पंचायत ऊमरी में भी जांच के दौरान नाली निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं होने के बावजूद 9,600 रुपए की राशि व्यय दर्शाई गई, जिसे जांच में वसूली योग्य बताया गया। लेकिन जनपद पंचायत आठनेर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा अब तक उक्त राशि की वसूली नहीं की गई, जो प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
आवेदक का कहना है कि जब भ्रष्टाचार के स्पष्ट साक्ष्य प्रस्तुत किए जा रहे हैं, तब जिला पंचायत बैतूल के वरिष्ठ अधिकारियों का दायित्व बनता है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए तथा भ्रष्टाचार के प्रमाण छिपाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
इसके अतिरिक्त, ग्राम पंचायत ऊमरी की जांच प्रतिवेदन की अपूर्ण सत्यापित प्रति प्रदान की गई है तथा आरटीआई अधिनियम के तहत प्रस्तुत अपील की सुनवाई के बावजूद आवेदक को पूर्ण एवं निःशुल्क जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जो स्पष्ट रूप से सूचना के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है।
अब सवाल यह है—
क्या जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी?
या फिर सच सामने लाने की ईमानदार कोशिश भी होगी?

रिपोर्टर : संदीप वाईकर 

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