नपा में 400 से अधिक नामांतरण आवेदन खारिज
आमला - शहर में तेजी से विकसित हो रही अवैध कॉलोनियां अब आम नागरिकों के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही हैं। सस्ते दाम,आसान किश्तों और जल्द प्लॉट उपलब्ध कराने के लालच में लोग जमीन तो खरीद रहे हैं,लेकिन बाद में उन्हें नामांतरण,भवन निर्माण अनुमति,बैंक लोन और मूलभूत सुविधाओं के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।शासन द्वारा अवैध कॉलोनियों पर सख्ती के निर्देश दिए जाने के बावजूद बिना अनुमति के प्लाटिंग का कारोबार लगातार जारी है। कई कॉलोनाइजर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) और नगर पालिका की स्वीकृति के बिना कृषि भूमि पर ही प्लॉट काटकर बेच रहे हैं। इसका सीधा नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ रहा है,जिन्होंने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर प्लॉट खरीदे हैं। जानकारी के अनुसार नगर पालिका में ऐसे कई मामलों में नामांतरण नहीं हो पा रहा है,जहां प्लॉट अवैध कॉलोनियों में खरीदे गए हैं। शासन के नियमों के तहत किसी भी कॉलोनी को विकसित करने के लिए कॉलोनाइजर लाइसेंस, भूमि डायवर्जन, स्वीकृत लेआउट,टीएनसीपी एनओसी,नगर पालिका अनुमति और रेरा पंजीयन अनिवार्य होता है। इन प्रक्रियाओं के बिना विकसित कॉलोनियों को शासन द्वारा अवैध माना जाता है।
मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव
अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को सड़क, नाली, पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसी आवश्यक सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। कई स्थानों पर लोगों ने प्लॉट की रजिस्ट्री तो करवा ली,लेकिन अब भवन निर्माण अनुमति और बिजली-पानी कनेक्शन के लिए उन्हें सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इसके अलावा बैंक भी ऐसे प्लॉटों पर आसानी से लोन देने से बच रहे हैं, क्योंकि जमीन का रिकॉर्ड और कॉलोनी की वैधता स्पष्ट नहीं होती।
2020 के बाद की प्लाटिंग पर सख्ती
सूत्रों के मुताबिक जनवरी 2020 के बाद बिना अनुमति की गई प्लाटिंग की रजिस्ट्रियों के नामांतरण पर शासन ने रोक लगा दी है। यही वजह है कि नगर पालिका आमला में वर्ष 2020 से अब तक करीब 400 नामांतरण आवेदन खारिज किए जा चुके हैं।
स्थिति यह है कि कई परिवार मकान बनाने का सपना लेकर प्लॉट खरीद चुके हैं, लेकिन अब नामांतरण और भवन निर्माण अनुमति नहीं मिलने से वे असमंजस की स्थिति में हैं। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ऐसे खरीदार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
क्या सावधानी बरतें खरीदार
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी प्लॉट को खरीदने से पहले संबंधित कॉलोनी की वैधता, टीएनसीपी अनुमति, रेरा पंजीयन, नगर पालिका स्वीकृति और भूमि डायवर्जन की जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए। केवल रजिस्ट्री हो जाना ही जमीन के पूरी तरह वैध होने की गारंटी नहीं माना जाता। “अवैध कॉलोनी में खरीदे गए प्लॉटों के नामांतरण पर शासन ने रोक लगाई है।”
अखिलेश राजनेगी राजस्व शाखा प्रभारी, नगर पालिका आमला
संवाददाता - दिलीप चौकीकर

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