पूर्व विधायक विजय मिश्रा की पत्नी रामलली मिश्रा को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 10 साल की सजा पर रोक, जमानत मंजूर
भदोही : प्रयागराज, उत्तर प्रदेश: शासन स्तर से चिन्हित माफिया और बाहुबली पूर्व विधायक विजय मिश्रा की पत्नी एवं पूर्व एमएलसी रामलली मिश्रा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनकी 10 वर्ष की सजा के अमल पर रोक लगाते हुए अपील लंबित रहने तक जमानत मंजूर कर दी है। न्यायमूर्ति राजबीर सिंह की अदालत ने 6 अगस्त 2026 को यह आदेश पारित किया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि सजा पर रोक का आदेश मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना दिया गया है। रामलली मिश्रा को भदोही की ज्ञानपुर ट्रायल कोर्ट ने केस क्राइम नंबर 273/2020, थाना गोपीगंज से जुड़े मामले में आईपीसी की धारा 387/34, 347/34, 419/34, 420/34, 467/34, 468/34, 471/34, 474/34, 450/34 और 506 तथा आईटी एक्ट की धारा 66-C/34 व 66-D/34 के तहत दोषी ठहराते हुए अधिकतम 10 वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट में दाखिल जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान रामलली मिश्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जीएस चतुर्वेदी ने दलील दी कि एफआईआर में मुख्य आरोप सह-आरोपी विजय मिश्रा के खिलाफ थे, रामलली मिश्रा के खिलाफ कोई गंभीर आरोप नहीं था। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि विवाद मूल रूप से फर्म के कारोबार, साझेदारी और खातों से जुड़ा व्यावसायिक विवाद है, जो सिविल प्रकृति का है और संबंधित मामला मध्यस्थता के लिए भी लंबित है। यह भी दलील दी गई कि रामलली मिश्रा की उम्र 70 वर्ष है, उन्हें मुकदमे के दौरान अग्रिम जमानत मिली थी और दोषसिद्धि के बाद करीब तीन माह की हिरासत वह पहले ही भुगत चुकी हैं।
वहीं, राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि की है। आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता को दबाव में साझेदारी में शामिल कराया, फर्म के बैंक खातों पर नियंत्रण किया और फर्म की रकम आरोपियों के खातों में ट्रांसफर की गई। शिकायतकर्ता की संपत्ति पर कब्जा करने का भी आरोप लगाया गया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि मामले की परिस्थितियों, साक्ष्यों और विशेष रूप से रामलली मिश्रा की 70 वर्ष की उम्र को देखते हुए सजा निलंबित करने का आधार बनता है। कोर्ट ने उनकी सजा के अमल को निलंबित करते हुए अपील लंबित रहने तक जमानत मंजूर कर दी। उन्हें संबंधित अदालत की संतुष्टि पर समान राशि के व्यक्तिगत बंधपत्र और दो जमानतदारों के साथ रिहा करने का आदेश दिया गया है, जिसमें एक जमानतदार परिवार का सदस्य होगा।
•साल 2020 में रिश्तेदार ने दर्ज कराया था केस––
वर्ष 2020 में गोपीगंज थाने में पूर्व विधायक विजय मिश्रा, उनकी पत्नी रामलली मिश्रा और पुत्र विष्णु मिश्रा आदि पर केस दर्ज हुआ था। पूर्व विधायक के कौलापुर निवासी रिश्तेदार कृष्णमोहन तिवारी ने संपत्ति और फर्म पर कब्जे तथा आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने विजय मिश्रा, रामलली मिश्रा और विष्णु मिश्रा को 10-10 वर्ष तथा बहू रूपा मिश्रा को चार वर्ष की सजा सुनाई थी। रूपा मिश्रा को कुछ दिन पहले ही जमानत मिल चुकी है, जबकि विजय मिश्रा और विष्णु मिश्रा अभी जेल में निरुद्ध हैं। विजय मिश्रा को कुछ अन्य मामलों में भी सजा हो चुकी है, उस पर 80 से ज्यादा मामले दर्ज हैं, जबकि पुत्र विष्णु मिश्रा पर भी कई केस दर्ज हैं।
•विजय मिश्रा चार बार विधायक, तो एमएलसी और जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं रामलली मिश्रा, कभी पूर्वांचल में चलता था सिक्का, 2 अरब से ज्यादा की संपत्ति हो चुकी है जब्त––
कभी पूर्वांचल में बाहुबल और अशोक के लिए चर्चा में रहने वाले विजय मिश्रा की सितारे इन दिनों गर्दिश में हैं। गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई कर प्रशासन ने पूरे कुनबे और गैंग की कमर तोड़ दी है। साल 2020 से ही विजय मिश्रा आगरा जेल में बंद हैं। विजय मिश्रा और उनके गैंग के लोगों की प्रशासन ने अब तक दो अरब रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की है, ईडी भी आय से अधिक की संपत्ति की जांच कर रही है।
रामलली मिश्रा मिर्जापुर-सोनभद्र सीट से समाजवादी पार्टी की एमएलसी रह चुकी हैं और भदोही की जिला पंचायत अध्यक्ष भी रही हैं। वहीं विजय मिश्रा ज्ञानपुर विधानसभा सीट से सपा और निषाद पार्टी के टिकट पर चार बार विधायक रह चुके हैं। वह एक बार ब्लॉक डीघ के प्रमुख और भदोही के जिला पंचायत अध्यक्ष भी रहे हैं।
रिपोर्टर : डी के मिश्रा
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