संत विवेकानंद उoमाo विद्यालय में मनाई गई गांधी व शास्त्री जयंती, प्रधानाचार्य ने दिया प्रेरक संदेश

भदोही : आज संत विवेकानंद उoमाo विद्यालय गेराई गोपीगंज भदोही के प्रांगण में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती के पावन अवसर पर एक प्रेरक सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और विद्यालय के प्रधानाचार्य अजय त्रिपाठी ने बच्चों को संबोधित करते हुए दोनों महान विभूतियों के जीवन, आंदोलनों और शाश्वत सिद्धांतों से परिचित कराया। बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और मार्गदर्शन के लिए प्रधानाचार्य द्वारा साझा किए गए मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:

 गांधी जी का जीवन परिचय 
* महात्मा गांधी (मोहनदास करमचंद गांधी) का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था।
* उन्होंने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
✊ स्वराज और नमक सत्याग्रह 
* स्वराज का अर्थ केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि देश के नागरिकों का आत्म-शासन और पूर्ण आत्मनिर्भरता था।
* नमक सत्याग्रह (दांडी मार्च) 1930 में अंग्रेजों के नमक कानून के खिलाफ गांधी जी द्वारा चलाया गया एक ऐतिहासिक शांतिपूर्ण आंदोलन था।
???? दलित आंदोलन 
* गांधी जी ने समाज से छुआछूत मिटाने के लिए दलित आंदोलन का नेतृत्व किया और उन्हें 'हरिजन' (ईश्वर के लोग) नाम दिया।
* उन्होंने दलितों के अधिकारों और सामाजिक समानता के लिए कई उपवास किए और रचनात्मक कार्यक्रम चलाए।
* इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य शोषित और पिछड़े वर्गों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें उनका हक दिलाना था।
* गांधी जी का मानना था कि जब तक समाज से भेदभाव खत्म नहीं होगा, तब तक सच्चा स्वराज नहीं मिल सकता।
????️ जय जवान-जय किसान: लाल बहादुर शास्त्री जी 
* 2 अक्टूबर 1904 को जन्मे भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी सादगी और ईमानदारी के प्रतीक थे, जिन्होंने 'जय जवान-जय किसान' का नारा देकर देश में स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की नई अलख जगाई।
???? गांधी जी के 5 मुख्य सिद्धांत (विद्यार्थियों के लिए) 
* i. सत्य : गांधी जी के लिए सत्य ही ईश्वर था, उनका मानना था कि हर परिस्थिति में सच्चाई का साथ देना ही मनुष्य का परम धर्म है।
* ii. शाकाहारी रवैया : वे जीव हिंसा के सख्त खिलाफ थे और उनका मानना था कि शाकाहार से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है बल्कि विचार भी शुद्ध होते हैं।
* iii. ब्रह्मचर्य : गांधी जी ने आत्म-नियंत्रण, वासनाओं पर विजय और अपनी आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाने के लिए ब्रह्मचर्य के पालन को अनिवार्य माना।
* iv. सादगी : उनका जीवन 'सादा जीवन, उच्च विचार' का प्रतीक था, जिसे उन्होंने खादी पहनकर और न्यूनतम संसाधनों में जीकर साबित किया।
* v. विश्वास : गांधी जी को ईश्वर की सत्ता और मनुष्य की अच्छाई पर अटूट विश्वास था, उनका मानना था कि भरोसे से ही दुनिया को बदला जा सकता है।
 निष्कर्ष :
संबोधन के अंत में प्रधानाचार्य अजय त्रिपाठी * ने सभी *छात्र-छात्राओं को इन दोनों महापुरुषों के विचारों को अपने दैनिक जीवन में उतारने, अनुशासित रहने और एक जिम्मेदार नागरिक बनने का संकल्प दिलाया। इस दौरान विद्यालय का पूरा स्टाफ और विद्यार्थी उपस्थित रहे ।

रिपोर्टर :  डी.के मिश्र

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