भारत की फ्रेंडलिस्ट बदली: रूस बेस्ट फ्रेंड, अमेरिका से कट्टी
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की कूटनीतिक तस्वीर में जबरदस्त फेरबदल हो गया है। जो दोस्त पहले ‘Always Online’ थे, अब ‘Last Seen Long Ago’ हो चुके हैं। और जिनके नाम नीचे स्क्रॉल करना पड़ता था, वो अब टॉप पर चमक रहे हैं। इस नई लिस्ट में तीन सबसे बड़े चेहरे हैं — चीन, रूस और अमेरिका।
कभी भारत की बेस्ट फ्रेंड लिस्ट में नंबर वन पर रहने वाला अमेरिका, अब टॉप-3 में भी फिसलता नजर आ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप की बयानबाजी और टैरिफ की धमकियों ने इस रिश्ते में ठंडक भर दी है। भारत अब अमेरिका को देखकर उतना मुस्कुरा नहीं रहा जितना पहले करता था। उल्टा, अब भारत के प्रधानमंत्री चीन जा रहे हैं — वो भी ट्रंप के सीजफायर क्रेडिट की धुन के बीच! लेकिन अगर कोई आज भी ‘दोस्ती निभाने’ की परिभाषा है, तो वो है रूस। ऑपरेशन सिंदूर में पाक को जवाब देने के लिए भारत ने जिस हथियार पर सबसे ज्यादा भरोसा किया, वो था रूस का S-400 डिफेंस सिस्टम। और इसने भरोसे को नाकाम नहीं होने दिया। पाक के कई ड्रोन इस सिस्टम की नजर में आए और ढेर हो गए।
रूस न सिर्फ ऑपरेशन में भारत के साथ था, बल्कि अमेरिकी दबाव में भी झुका नहीं। ट्रंप चाहें जितनी बार टैरिफ का ‘ट्रंप कार्ड’ खेलें, पुतिन और मोदी की केमिस्ट्री अडिग है। NSA अजीत डोभाल का मॉस्को दौरा और रूस के टॉप आर्मी अधिकारियों की भारत से बातचीत — साफ बताती है कि इस दोस्ती की नींव गहरी है, और ट्रंप के बयान उस पर असर नहीं डाल सकते।
वहीं ,अब आते हैं फ्रेंडलिस्ट के सबसे कंट्रोवर्शियल कैरेक्टर पर — चीन। भारत ने चीन से रिश्ते फिर से पटाने की कोशिश जरूर की है, लेकिन भरोसे की दीवार अभी भी दरकी हुई है। अजीत डोभाल, राजनाथ सिंह, जयशंकर — सब एक के बाद एक बीजिंग पहुंच चुके हैं। और अब खुद पीएम मोदी भी SCO समिट के लिए चीन का रुख करने वाले हैं।लेकिन, ये दोस्ती ‘ब्लॉक’ करने वाली नहीं है — बल्कि ‘सीन ज़ोन’ वाली है। बातचीत है, मेलजोल है, लेकिन आंख मूंदकर भरोसा नहीं। क्योंकि गलवान की घटना अब भी भारत की याददाश्त में ताजा है।भारत ने मानसरोवर यात्रा बहाल की, वीज़ा फिर से दिए, सीधी फ्लाइट्स की चर्चा शुरू की — लेकिन साथ ही ऑपरेशन सिंदूर में चीन की भूमिका को उजागर कर दिया। साफ संकेत है: "ड्रैगन! तू दोस्त बन सकता है, लेकिन बेस्ट फ्रेंड नहीं।"तो अब फ्रेंडलिस्ट को समझिए-
रूस — सबसे ऊपर, सबसे भरोसेमंद
चीन — करीब है, लेकिन कड़ी निगरानी में
अमेरिका — पुराने रिश्तों की फाइल में, रिसायकल बिन के करीब
देखा जाए तो दुनिया बदल रही है, और भारत भी... अब दोस्ती सिर्फ फोटो और भाषणों से नहीं चलेगी — असली इम्तिहान संकट के समय होता है। ऑपरेशन सिंदूर ने यही दिखाया: जो साथ खड़ा रहा, वही सच्चा यार निकला!


No Previous Comments found.